असम में लगातार बढ़ रही बाढ़ की मुश्किलें, 25 हजार से अधिक लोग प्रभावित

गुवाहाटी: असम के कई हिस्सों में बाढ़ की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। राज्य के सात जिलों में बाढ़ का असर देखने को मिल रहा है, जहां 155 गांवों के 25 हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिले में बाढ़ से एक महिला की मौत होने के बाद राज्य में बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं में मृतकों की संख्या बढ़कर 108 हो गई है।

सात जिलों में बाढ़ का असर

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के अनुसार, गोलपारा, शिवसागर, बिश्वनाथ, नागांव, मोरीगांव, पश्चिम कार्बी आंगलोंग और कछार जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। मौजूदा स्थिति में करीब 25,083 लोग बाढ़ की चपेट में हैं। प्रभावित लोगों के लिए 13 राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां विस्थापित परिवारों को ठहराने की व्यवस्था की गई है।

6,477 हेक्टेयर से ज्यादा फसल प्रभावित

बाढ़ का असर केवल आबादी तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुंचा है। एएसडीएमए के आंकड़ों के मुताबिक करीब 6,477.31 हेक्टेयर फसल क्षेत्र जलभराव की वजह से प्रभावित हुआ है। इससे किसानों की आजीविका पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

खतरे के निशान से ऊपर बह रहीं नदियां

राज्य के कुछ हिस्सों में नदियों का बढ़ता जलस्तर प्रशासन के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। नुमालीगढ़ में धनसिरी नदी और मतिजुरी में कटखाल नदी अपने-अपने खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। ऐसे में निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को लेकर प्रशासन सतर्क है।

राहत और बचाव अभियान जारी

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य लगातार जारी हैं। स्थानीय प्रशासन प्रभावित लोगों तक जरूरी सहायता पहुंचाने के साथ-साथ संवेदनशील इलाकों की निगरानी कर रहा है। अधिकारियों की टीमें घरों, कृषि भूमि और अन्य संपत्तियों को हुए नुकसान का आकलन भी कर रही हैं।

जलस्तर पर प्रशासन की नजर

नदियों के जलस्तर में होने वाले बदलाव पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रशासन उन इलाकों की भी पहचान कर रहा है, जहां आने वाले समय में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। निचले और नदी किनारे बसे क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

मानसून के दौरान असम में बार-बार बाढ़ की स्थिति बनने से राज्य के कई नदी तटीय और निचले इलाके प्रभावित होते रहे हैं। फिलहाल प्रशासन स्थिति की लगातार समीक्षा कर रहा है और जरूरत के अनुसार राहत एवं बचाव उपायों को आगे बढ़ाया जा रहा है।

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