दुर्ग में नेशनल लोक अदालत: 4.10 लाख से अधिक मामलों का निराकरण, 685.90 करोड़ की समझौता राशि पर सहमति

दुर्गवर्षों से चले आ रहे पारिवारिक विवाद हों, पुरानी रंजिश, चोरी का मामला या फिर बैंक, बिजली और दूरसंचार से जुड़े बकाये—शनिवार को आयोजित वर्ष 2026 की तीसरी नेशनल लोक अदालत में हजारों विवादों का अंत संवाद, समझौते और आपसी सहमति के जरिए हुआ। दुर्ग जिले में आयोजित लोक अदालत में 4 लाख 10 हजार 720 न्यायालयीन एवं प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण किया गया। वहीं करीब ₹685.90 करोड़ की समझौता राशि पर सहमति बनी।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देश, छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के मार्गदर्शन तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के निर्देशन में जिले के विभिन्न न्यायालयों एवं न्यायिक संस्थानों में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया।

37 खंडपीठों में हुई मामलों की सुनवाई

नेशनल लोक अदालत के लिए कुल 37 खंडपीठों का गठन किया गया था। परिवार न्यायालय दुर्ग, जिला न्यायालय दुर्ग, व्यवहार न्यायालय भिलाई-3, पाटन और धमधा के अलावा किशोर न्याय बोर्ड, श्रम न्यायालय, स्थायी लोक अदालत (जनोपयोगी सेवाएं), राजस्व न्यायालय और उपभोक्ता फोरम सहित विभिन्न संस्थानों में मामलों की सुनवाई की गई।

लोक अदालत में 13,851 न्यायालयीन प्रकरण तथा 3,96,869 प्री-लिटिगेशन प्रकरण निराकृत हुए। इस तरह कुल 4,10,720 मामलों का समाधान किया गया। इनमें बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थाओं, विद्युत और दूरसंचार से जुड़े बड़ी संख्या में प्री-लिटिगेशन विवाद भी शामिल रहे।

पति-पत्नी ने माला पहनाकर खत्म किया विवाद

लोक अदालत में कई ऐसे मामले भी सामने आए, जिनका महत्व आंकड़ों से कहीं अधिक रहा। परिवार न्यायालय दुर्ग में पति-पत्नी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। मामला लोक अदालत में पहुंचने के बाद दोनों पक्षों को उनके कानूनी अधिकारों के साथ-साथ भविष्य, सम्मान, विश्वास और पारिवारिक जीवन के पहलुओं पर विचार करने के लिए प्रेरित किया गया।

समझाइश के बाद दोनों ने पुराने मतभेद भुलाकर सम्मान और विश्वास के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया। अदालत परिसर में ही दोनों ने एक-दूसरे को माला पहनाई। इस तरह एक मुकदमा समाप्त होने के साथ ही एक परिवार को फिर से साथ रहने का अवसर मिला।

वर्षों पुरानी पारिवारिक रंजिश का भी हुआ समाधान

एक अन्य मामले में एक ही परिवार के सदस्यों के बीच लंबे समय से चली आ रही कटुता आपराधिक मुकदमे तक पहुंच गई थी। वर्षों से लंबित इस विवाद के कारण पारिवारिक रिश्तों में तनाव और दूरी बनी हुई थी।

लोक अदालत में न्यायालय ने पक्षकारों की भावनाओं और पारिवारिक संबंधों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए संवाद का माहौल तैयार किया। आपसी बातचीत के बाद विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझा लिया गया।

इस मामले में पांच संबंधित पक्षकार थे। सभी की व्यक्तिगत उपस्थिति संभव नहीं होने पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कुछ पक्षकारों ने भाग लिया और समझौते की प्रक्रिया पूरी की। तकनीक ने दूरी कम की और आपसी संवाद के जरिए विवाद का समाधान संभव हुआ।

चोरी की मोटरसाइकिल के मामले में माफी के बाद समझौता

एक अन्य मामले में रात के समय घर लौट रहे एक व्यक्ति का ईयरफोन रास्ते में गिर गया। उसे उठाने के लिए जब वह वापस आया तो उसकी मोटरसाइकिल वहां नहीं थी। इसके बाद मोटरसाइकिल चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई और मामला न्यायालय तक पहुंचा।

बाद में मोटरसाइकिल बरामद कर प्रार्थी को सुपुर्द कर दी गई। नेशनल लोक अदालत में प्रकरण आने पर प्रार्थी ने आपसी राजीनामे की इच्छा जताई। न्यायालय की समझाइश के बाद आरोपियों ने भविष्य में ऐसी गलती नहीं दोहराने की बात कहते हुए प्रार्थी से माफी मांगी। प्रार्थी ने भी समझौते के लिए सहमति दे दी। इसके साथ ही मामला आपसी राजीनामे के आधार पर सौहार्दपूर्ण वातावरण में समाप्त हो गया।

लोक अदालत में ‘Justice + Care’ की पहल

नेशनल लोक अदालत के दौरान न्यायालय परिसर में आने वाले पक्षकारों और आम नागरिकों के लिए जिला चिकित्सालय, दुर्ग के सहयोग से एक दिवसीय निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर भी लगाया गया।

चिकित्सा अधिकारी डॉ. निवेदिता गार्डिया और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया तथा आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराईं। न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, पक्षकारों और बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने शिविर का लाभ उठाया।

इस पहल के जरिए न्याय के साथ मानवीय संवेदना का संदेश दिया गया—“Justice for the case, Care for the person.”

केंद्रीय जेल के बंदियों के उत्पादों की लगी प्रदर्शनी

नेशनल लोक अदालत के अवसर पर केंद्रीय जेल, दुर्ग में निरुद्ध बंदियों द्वारा तैयार किए गए जेल उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री भी की गई। लोगों ने इन उत्पादों की सराहना की।

इस पहल ने यह संदेश भी दिया कि न्याय व्यवस्था केवल दंड तक सीमित नहीं है, बल्कि सुधार, पुनर्वास और बंदियों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाना भी न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

संवाद और समझौते से विवादों के समाधान पर जोर

नेशनल लोक अदालत ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि न्याय का उद्देश्य केवल यह तय करना नहीं है कि कौन सही है और कौन गलत, बल्कि ऐसे समाधान का रास्ता निकालना भी है, जिससे दोनों पक्ष भविष्य में आगे बढ़ सकें।

दुर्ग में आयोजित इस लोक अदालत में लाखों मामलों का निपटारा इसी सोच के साथ किया गया। कहीं वर्षों पुराना विवाद समाप्त हुआ, कहीं परिवार फिर से जुड़ा और कहीं आपसी सहमति से मुकदमे का शांतिपूर्ण अंत हुआ। इस तरह लोक अदालत ने कानून के साथ मानवीय संवेदना और संवाद को जोड़ते हुए न्याय की एक प्रभावी मिसाल पेश की।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *