नई दिल्ली। जीएसटी व्यवस्था को ज्यादा सरल और कारोबारी हितैषी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने कई अहम बदलाव किए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में टैक्स दरों में बदलाव के बजाय सिस्टम को आसान बनाने और अधिकारियों की मनमानी पर रोक लगाने पर जोर दिया गया। बैठक में रजिस्ट्रेशन, रिटर्न, रिफंड, इनपुट टैक्स क्रेडिट, माल की जांच और अभियोजन से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं।
नए बदलावों को जीएसटी व्यवस्था के अगले चरण यानी ‘GST 2.0’ की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। सरकार का जोर अब कागजी प्रक्रिया कम करने और ज्यादा से ज्यादा काम ऑटोमेशन व डेटा आधारित सिस्टम से कराने पर है।
कम जोखिम वाले कारोबारियों को जल्द मिलेगा GST नंबर
जीएसटी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को आसान करते हुए कम जोखिम वाले कारोबारियों के आवेदन को सिस्टम के स्तर पर जल्द मंजूरी देने की व्यवस्था की गई है। ऐसे मामलों में करीब तीन दिन के भीतर रजिस्ट्रेशन मिलने का प्रावधान है। मौजूदा समय में बड़ी संख्या में रजिस्ट्रेशन इसी ऑटोमेटेड प्रक्रिया के जरिए हो रहे हैं।
व्यवसाय के नाम, पते या निदेशक से जुड़े सामान्य बदलावों को भी सिस्टम के जरिए मंजूरी देने की व्यवस्था की जा रही है। इससे कारोबारियों को छोटी-छोटी प्रक्रियाओं के लिए विभागीय दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
रिटर्न में गलती सुधारने का मिलेगा मौका
जीएसटी रिटर्न में छोटी-मोटी गड़बड़ियों को लेकर बड़ी संख्या में नोटिस जारी होने की समस्या को कम करने की कोशिश की गई है। अब बिल या बिक्री विवरण में हुई वास्तविक गलती को सुधारने की व्यवस्था को ज्यादा सरल बनाया जाएगा।
यदि सप्लायर अपने बिल में आवश्यक सुधार करता है, तो उसका लाभ संबंधित खरीदार को भी सिस्टम के जरिए मिल सकेगा। गलत GST नंबर या पुराने विवरण में सुधार के लिए भी ज्यादा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
रिफंड प्रक्रिया भी होगी तेज
रिफंड से जुड़े मामलों में भी कारोबारियों को राहत दी गई है। रिफंड आवेदन स्वीकार करने की समयसीमा को कम किया गया है। अधिकांश मामलों में अब अधिकारी के हस्तक्षेप के बजाय सिस्टम खुद रिफंड प्रक्रिया पूरी करेगा।
कैश लेजर में अतिरिक्त पड़ी राशि को भी ऑटोमेटेड तरीके से संबंधित खाते में भेजने की व्यवस्था की जा रही है। इससे कंपनियों और कारोबारियों की कार्यशील पूंजी लंबे समय तक फंसी नहीं रहेगी।
छोटे मामलों में नोटिस से राहत
जीएसटी से जुड़े छोटे विवादों को लेकर भी व्यवस्था को सरल किया गया है। 10 हजार रुपये से कम राशि वाले मामलों में नोटिस जारी नहीं करने का प्रावधान किया गया है। साथ ही नोटिस, सुनवाई और आदेश की प्रक्रिया के लिए एक समान व्यवस्था तैयार की जाएगी।
ईमानदार कारोबारियों के ITC की होगी सुरक्षा
इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। जिन खरीदारों के पास वैध बिल है, माल प्राप्त हो चुका है और भुगतान भी पूरा किया जा चुका है, ऐसे ईमानदार करदाताओं के हितों की सुरक्षा के लिए व्यवस्था बनाई जाएगी।
इसके अलावा कुछ आवश्यक कारोबारी खर्चों पर ITC से जुड़े प्रावधानों को भी आसान किया गया है। हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस, टेलीकॉम टावर, कुछ पाइपलाइन तथा नष्ट किए जाने वाले एक्सपायर्ड फ्री सैंपल जैसे मामलों को भी इसके दायरे में लाया गया है।
कारोबार बंद करने की प्रक्रिया होगी आसान
छोटे कारोबारियों के लिए GST रजिस्ट्रेशन कैंसिल कराने की प्रक्रिया को भी ऑटोमेटेड बनाने पर जोर दिया गया है। कारोबार बंद करने वाले करदाताओं के लिए अंतिम रिटर्न और कैंसिलेशन की प्रक्रिया को आपस में जोड़ा जाएगा।
5 करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वाले और सीधे ग्राहकों को सामान बेचने वाले छोटे व्यापारियों के लिए भी रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया आसान होगी। ऐसे कारोबारी सालाना रिटर्न और तिमाही आधार पर टैक्स भुगतान की व्यवस्था का लाभ ले सकेंगे।
सड़क पर माल की जांच के नियम सख्त
अब रास्ते में माल ले जा रहे वाहनों की जांच के लिए अधिकारियों की मनमानी पर रोक लगाने की व्यवस्था की गई है। वाहन रोकने के लिए वरिष्ठ अधिकारी की मंजूरी और ठोस खुफिया जानकारी की आवश्यकता होगी।
इसके अलावा ट्रांजिट राज्य में गुजर रहे मालवाहक वाहनों की जांच को लेकर भी सीमाएं तय की गई हैं। जांच मुख्य रूप से उस राज्य में की जाएगी जहां से माल रवाना हुआ है या जहां माल पहुंचना है।
GST गिरफ्तारी और अभियोजन के नियम बदले
जीएसटी से जुड़े मामलों में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव गिरफ्तारी और अभियोजन से संबंधित बताया जा रहा है। नए प्रावधानों के तहत जीएसटी अधिकारियों के गिरफ्तारी संबंधी अधिकार को समाप्त करने का फैसला किया गया है।
वहीं अभियोजन की सीमा को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये किया गया है। सामान्य जुर्माने की अधिकतम राशि को भी 25 हजार रुपये से घटाकर 10 हजार रुपये किया गया है। सरकार का मानना है कि डेटा आधारित निगरानी बढ़ने से कर अनुपालन बेहतर होगा और अनावश्यक कार्रवाई की जरूरत कम होगी।
निर्यात सेवाओं को लेकर भी बड़ा बदलाव
विदेशी ग्राहकों को सेवा देने वाली भारतीय कंपनियों के लिए भी नियमों में राहत दी गई है। भारतीय कंपनी अगर विदेश में अपनी शाखा के जरिए विदेशी ग्राहक को सेवा देती है, तो कुछ शर्तों के तहत उसे निर्यात का लाभ मिल सकेगा।
इसी तरह विदेशी ग्राहक का सामान भारत लाकर उसकी टेस्टिंग, मरम्मत या रिसर्च जैसी सेवाएं उपलब्ध कराने के मामलों में भी निर्यात सेवा से जुड़े लाभ का रास्ता आसान किया गया है।
Amazon और Flipkart जैसे प्लेटफॉर्म पर छोटे कारोबारियों को फायदा
ई-कॉमर्स कारोबार को बढ़ावा देने के लिए भी नियमों में बदलाव किया गया है। छोटे विक्रेताओं को दूसरे राज्य में मौजूद ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के वेयरहाउस को अपने प्रमुख कारोबारी स्थान के तौर पर इस्तेमाल करने की सुविधा मिलेगी।
इससे छोटे व्यापारी अपने राज्य से ही दूसरे राज्यों में सामान बेच सकेंगे और अलग-अलग राज्यों में कार्यालय या कारोबारी स्थान बनाने की जरूरत कम होगी। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के अलग-अलग बिजनेस मॉडल के बावजूद टैक्स से जुड़े नियमों में समानता लाने की कोशिश की गई है।
फिलहाल GST दरों में कोई बदलाव नहीं
जीएसटी परिषद की इस बैठक में किसी वस्तु या सेवा की टैक्स दर में बदलाव नहीं किया गया। परिषद का फोकस इस बार रेट बदलने के बजाय मौजूदा व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाने पर रहा।
भविष्य में टैक्स दरों में बदलाव के लिए साल में एक अलग बैठक आयोजित करने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है।
कपड़ा कारोबारियों ने फैसलों का किया स्वागत
क्लॉथिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CMAI) ने जीएसटी से जुड़े कई नए फैसलों का स्वागत किया है। संगठन के अध्यक्ष संतोष कटारिया ने गिरफ्तारी के प्रावधान में बदलाव और अभियोजन संबंधी नियमों को कारोबारियों के लिए सकारात्मक कदम बताया।
हालांकि, उन्होंने 2,500 रुपये से अधिक कीमत वाले कपड़ों पर 18 फीसदी जीएसटी जारी रहने पर निराशा जताई। उनका कहना है कि त्योहारी सीजन को देखते हुए इस स्लैब की सीमा बढ़ाई जाती तो कपड़ों की मांग और बिक्री में तेजी आ सकती थी।