नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना की उत्तरी कमान ने कई मोर्चों पर एक साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। उत्तरी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा के मुताबिक, अभियान में निशाना बनाने के लिए चिह्नित नौ ठिकानों में से सात को नष्ट करने की जिम्मेदारी उनकी कमान को सौंपी गई थी, जिसे सफलतापूर्वक पूरा किया गया। उन्होंने अभियान के 88 घंटों के दौरान सैन्य कार्रवाई, सीमा पर तनाव और भविष्य की चुनौतियों को लेकर भी अहम जानकारी साझा की।
88 घंटे के अभियान में हवाई और जमीनी कार्रवाई
लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों का उल्लेख करते हुए बताया कि अभियान के दौरान हवाई कार्रवाई और मिसाइल हमलों के साथ जमीन पर तैनात सैनिक भी लगातार सक्रिय रहे। इस दौरान उत्तरी कमान ने अपने निर्धारित लक्ष्यों पर कार्रवाई की और संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य तैयारियां बनाए रखीं।
उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान सीमा पर गोलीबारी और संघर्षविराम उल्लंघन की घटनाएं भी हुईं। उनके अनुसार, इन 88 घंटों में करीब 12 हजार गोलियां चलीं, जो उस अवधि में सीमा पर बने तनावपूर्ण हालात को दर्शाती हैं।
चीन सीमा से सियाचिन तक उत्तरी कमान की जिम्मेदारी
उत्तरी कमान की जिम्मेदारियां केवल आतंकवाद विरोधी अभियानों तक सीमित नहीं हैं। यह कमान पूर्वी लद्दाख में चीन से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC), सियाचिन ग्लेशियर और पाकिस्तान से लगी नियंत्रण रेखा (LoC) सहित कई संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा संभालती है।
लेफ्टिनेंट जनरल शर्मा के अनुसार, पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ करीब 832 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा की निगरानी उत्तरी कमान की जिम्मेदारी है। इसके अलावा, सियाचिन क्षेत्र में लगभग 121.5 किलोमीटर लंबी वास्तविक ग्राउंड पोजिशन लाइन और करीब 772 किलोमीटर लंबी नियंत्रण रेखा पर भी सेना को सतर्क रहना पड़ता है।
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ अभियान जारी
सीमाओं की सुरक्षा के साथ उत्तरी कमान जम्मू-कश्मीर के भीतरी इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियान भी चलाती है। श्रीनगर घाटी, जम्मू, राजौरी और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना इसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल है।
लेफ्टिनेंट जनरल शर्मा ने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों में एक साथ सैन्य तैयारियां बनाए रखना अधिकारियों और जवानों के लिए बड़ी चुनौती है। इसके लिए बेहतर तालमेल, प्रभावी नेतृत्व और मजबूत परिचालन क्षमताओं की जरूरत होती है।
भविष्य के संघर्षों को लेकर सेना की तैयारी
लेफ्टिनेंट जनरल शर्मा ने भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तरी कमान को इस संभावना के लिए तैयार रहना होगा कि संघर्ष उसके जिम्मेदारी वाले सीमावर्ती क्षेत्रों में शुरू हो सकता है। ऐसी स्थिति में सेना को तेजी से निर्णय लेने और तत्काल कार्रवाई करने में सक्षम होना जरूरी है।
उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में संघर्ष का दायरा बढ़ने की आशंका को ध्यान में रखते हुए सैन्य क्षमताओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों ने भी अलग-अलग मोर्चों पर एक साथ कार्रवाई करने, सटीक लक्ष्य साधने और सैनिकों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने के महत्व को रेखांकित किया है।