बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षक भर्ती के आरक्षण रोस्टर को लेकर चल रहे विवाद में हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस एके प्रसाद की एकल पीठ ने भर्ती प्रक्रिया में रद्द की जा चुकी आरक्षण व्यवस्था के इस्तेमाल से जुड़े मामले पर सुनवाई की। अदालत ने विवादित आरक्षण व्यवस्था को निरस्त कर दिया, लेकिन पहले से नियुक्त शिक्षकों को तत्काल सेवा से हटाने का निर्देश नहीं दिया।
यह विवाद स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से 4 मई 2023 को जारी शिक्षक भर्ती विज्ञापन से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने भर्ती में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए निर्धारित आरक्षण और पुराने आरक्षण रोस्टर के इस्तेमाल पर सवाल उठाए थे।
2012 की अधिसूचना को लेकर विवाद
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, राज्य सरकार ने 29 नवंबर 2012 की अधिसूचना के माध्यम से प्रदेश में कुल आरक्षण का अनुपात बढ़ाकर 58 प्रतिशत कर दिया था। हालांकि, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 19 सितंबर 2022 को इस आरक्षण व्यवस्था को असंवैधानिक ठहराते हुए निरस्त कर दिया था।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में तर्क दिया कि जब 58 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था पहले ही निरस्त की जा चुकी थी, तो उसके आधार पर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाना उचित नहीं था। उन्होंने भर्ती विज्ञापन में पुराने आरक्षण रोस्टर के इस्तेमाल को चुनौती दी।
पहले से नियुक्त शिक्षकों को तत्काल हटाने का आदेश नहीं
मामले में अदालत ने विवादित आरक्षण व्यवस्था को निरस्त करते हुए पहले से नियुक्त शिक्षकों को तत्काल सेवा से हटाने का निर्देश नहीं दिया। इससे मौजूदा नियुक्तियों पर तत्काल प्रभाव डालने वाली कार्रवाई नहीं हुई है।
इस मामले का आगे भर्ती प्रक्रिया और आरक्षण रोस्टर पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह अदालत के विस्तृत आदेश और संबंधित विभाग की आगामी कार्रवाई से स्पष्ट होगा।