इंफाल। मणिपुर में जारी हिंसा और सुरक्षा चुनौतियों के बीच केंद्र सरकार ने सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम यानी AFSPA की अवधि अगले छह महीने के लिए बढ़ा दी है। गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, 1 अक्टूबर 2026 से पूरे मणिपुर को अशांत क्षेत्र माना जाएगा। हालांकि, राज्य के 13 पुलिस थाना क्षेत्रों को AFSPA के दायरे से बाहर रखा गया है।
सरकार का यह आदेश अगले छह महीने तक प्रभावी रहेगा। इसे जरूरत पड़ने पर निर्धारित अवधि से पहले भी वापस लिया जा सकता है। मणिपुर में मई 2023 से मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जारी जातीय हिंसा के कारण सुरक्षा व्यवस्था लगातार चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
AFSPA के तहत मिलती हैं विशेष शक्तियां
AFSPA की धारा 3 के तहत किसी क्षेत्र को अशांत घोषित किए जाने के बाद वहां तैनात सशस्त्र बलों को कानून के तहत विशेष अधिकार मिलते हैं। निर्धारित परिस्थितियों में जवानों को बिना वारंट गिरफ्तारी, तलाशी और बल प्रयोग जैसी शक्तियां प्राप्त होती हैं।
कामजोंग में चार लोगों की हत्या के बाद बढ़ी चिंता
AFSPA बढ़ाने का फैसला ऐसे समय आया है, जब मणिपुर के कामजोंग जिले में म्यांमार सीमा के पास पिलोंग गांव में चार लोगों के शव मिलने से सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि म्यांमार की ओर से आए संदिग्ध हमलावरों ने ग्रामीणों पर हमला किया।
मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि समाज में इस तरह की हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है और ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
फरवरी के बाद 40 से ज्यादा मौतों का दावा
अधिकारियों के मुताबिक, फरवरी में नागा और कुकी समुदायों के बीच हुई झड़पों के बाद से राज्य में 40 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। सितंबर में भी तामेंगलोंग जिले में गोलीबारी की अलग-अलग घटनाओं में कई लोगों के मारे जाने की जानकारी सामने आई।
मई 2023 से जारी जातीय संघर्ष के चलते मणिपुर में बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं। लगातार सामने आ रही हिंसा की घटनाओं के बीच केंद्र ने राज्य में AFSPA की अवधि बढ़ाने का फैसला लिया है।