नई दिल्ली: दवा अनुसंधान के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को भविष्य का सबसे बड़ा बदलावकारी उपकरण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI की मदद से नई दवाओं की खोज न केवल तेज होगी, बल्कि ज्यादा सटीक और प्रभावी भी बनेगी। इससे हेल्थकेयर सेक्टर में इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा और मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध हो सकेगा।
‘इंडिया फार्मा 2026’ के दौरान आयोजित एक उच्चस्तरीय चर्चा में नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों और उद्योग प्रतिनिधियों ने इस बात पर जोर दिया कि सिर्फ डिजिटल सिस्टम अपनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरी दवा खोज प्रक्रिया को आधुनिक तकनीकों के अनुसार फिर से डिजाइन करने की जरूरत है। इसके लिए मजबूत डेटा इन्फ्रास्ट्रक्चर और एडवांस टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म को आधार बनाना अनिवार्य बताया गया।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में यह बात सामने आई कि नीतियों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन के बीच मौजूद अंतर को जल्द से जल्द खत्म करना होगा। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा देने के लिए उद्योग की सक्रिय भागीदारी जरूरी है, साथ ही सरकारी लैब नेटवर्क को भी मजबूत किया जाना चाहिए।
स्वास्थ्य और फार्मा क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने यह भी कहा कि भारत को अपने खुद के R&D मॉडल पर ज्यादा ध्यान देना होगा, ताकि नवाचार को बढ़ावा मिले और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा की जा सके। इसके लिए उद्योग और अकादमिक संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल और भरोसे की जरूरत बताई गई।
चर्चा के दौरान यह भी सामने आया कि दवा उद्योग में शुरुआती स्तर की खोजों को वैश्विक उत्पादों में बदलने के लिए निवेश और सहयोग के नए मॉडल अपनाने होंगे। साथ ही, एक ऐसा नियामक ढांचा तैयार करने पर जोर दिया गया जो पारदर्शी, तेज और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो।
एक अन्य सत्र में AI की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई, जिसमें बताया गया कि यह तकनीक दवा विकास की पूरी प्रक्रिया—डिस्कवरी से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक—को अधिक कुशल बना सकती है।
इसके अलावा, वैश्विक अनुबंध अनुसंधान और विनिर्माण (CRDMO) क्षेत्र में भारत की बढ़ती हिस्सेदारी पर भी ध्यान दिया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है और आने वाले वर्षों में देश को वैश्विक फार्मा हब बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।