ईरान पर अमेरिका की सख्ती: 31 जहाज रोके, 17 वॉरशिप और 10,000 सैनिक तैनात

वॉशिंगटन/तेहरान : अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए समुद्र में अपनी कार्रवाई को और तेज कर दिया है। यू.एस. सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, 13 अप्रैल से जारी इस अभियान के तहत अब तक 31 जहाजों को रास्ता बदलने या वापस लौटने के लिए मजबूर किया जा चुका है। इन कदमों का मकसद ईरान से जुड़े समुद्री व्यापार को सीमित करना है। साफ कर दिया गया है कि किसी भी जहाज को ईरानी बंदरगाहों तक पहुंचने या वहां से निकलने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

अमेरिका की यह कार्रवाई केवल खाड़ी क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य समुद्री इलाकों में भी इसका असर देखा जा रहा है। रोके गए जहाजों में बड़ी संख्या तेल टैंकरों की बताई जा रही है, जिनमें से अधिकांश ने अमेरिकी निर्देशों का पालन किया है।

इस पूरे ऑपरेशन के लिए अमेरिका ने भारी सैन्य ताकत झोंक दी है। तैनाती में 10,000 से ज्यादा सैनिक, 100 से अधिक फाइटर और निगरानी विमान, साथ ही 17 से ज्यादा युद्धपोत शामिल हैं। इनमें एयरक्राफ्ट कैरियर, मिसाइल से लैस डेस्ट्रॉयर, ड्रोन और रिफ्यूलिंग व सर्विलांस विमान भी शामिल हैं, जो लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।

इस नाकेबंदी का सबसे बड़ा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पड़ा है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग माना जाता है। यहां जहाजों की आवाजाही धीमी पड़ गई है और जल्द स्थिति सामान्य होने की उम्मीद कम नजर आ रही है। बाजार के रुझान भी संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में इस क्षेत्र में अनिश्चितता बनी रह सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम केवल सैन्य दबाव तक सीमित नहीं है, बल्कि ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा भी है। हालांकि युद्धविराम की अवधि बढ़ा दी गई है, लेकिन बातचीत में अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। ऐसे में अमेरिका अपनी सख्त नीति जारी रख सकता है।

अब नजर इस बात पर टिकी है कि दोनों देशों के बीच कोई समझौता हो पाता है या तनाव और बढ़ता है। फिलहाल, खाड़ी क्षेत्र खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में हालात जल्द सामान्य होते नहीं दिख रहे हैं।

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