ईरान तनाव के बीच तेल टैंकरों की नई चाल, होर्मुज जलडमरूमध्य से ट्रांसपोंडर बंद कर निकले जहाज

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों की गतिविधियां अचानक सुर्खियों में आ गई हैं। कच्चा तेल लेकर जा रहे तीन बड़े टैंकरों ने हाल के दिनों में अपने ट्रांसपोंडर सिस्टम बंद कर इस मार्ग को पार किया, जिससे वैश्विक तेल बाजार और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है।

शिपिंग डेटा फर्म केप्लर और LSEG की रिपोर्ट के अनुसार, इन जहाजों ने ईरानी निगरानी और संभावित हमलों से बचने के लिए अपनी लोकेशन छिपाई। माना जा रहा है कि यह तरीका खाड़ी क्षेत्र से तेल निर्यात जारी रखने की नई रणनीति के रूप में अपनाया जा रहा है।

दो सुपर टैंकरों में 40 लाख बैरल तेल

रिपोर्ट के मुताबिक, दो बहुत बड़े क्रूड कैरियर (VLCC) — एजियोस फेनौरियोस वन और कियारा एम — ने हाल ही में होर्मुज स्ट्रेट पार किया। दोनों जहाजों में इराक का करीब 20-20 लाख बैरल कच्चा तेल भरा हुआ था।

एजियोस फेनौरियोस वन वियतनाम की ओर बढ़ रहा है, जहां 26 मई तक इसके पहुंचने की संभावना है। यह तेल न्ही सन रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल फैसिलिटी में उतारा जाएगा। यह टैंकर 17 अप्रैल को इराक के बसरा से रवाना हुआ था और इससे पहले दो बार मार्ग पार करने में असफल रहा था। इसका संचालन ग्रीस की शिपिंग कंपनी ईस्टर्न मेडिटेरियन मैरीटाइम कर रही है।

ट्रांसपोंडर बंद कर ‘गायब’ हुए जहाज

रिपोर्ट में बताया गया है कि कियारा एम ने भी गल्फ से निकलते समय अपना ट्रांसपोंडर बंद कर दिया था। ट्रांसपोंडर बंद होने से जहाजों की वास्तविक स्थिति ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। यह जहाज सैन मैरिनो के झंडे के तहत रजिस्टर्ड है और इसका संचालन शंघाई की कंपनी करती है, जबकि मालिकाना हक मार्शल आइलैंड्स की संस्था के पास है।

ADNOC भी अपनाती रही रणनीति

इससे पहले अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी का एक टैंकर भी इसी तरह 20 लाख बैरल तेल लेकर होर्मुज पार कर चुका है और बाद में फुजैरा टर्मिनल पर माल उतारा गया था। कंपनियां अब खाड़ी क्षेत्र में फंसे तेल को सुरक्षित निकालने के लिए ऐसे तरीकों का इस्तेमाल कर रही हैं।

क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव बढ़ने से इस क्षेत्र में हर गतिविधि पर अंतरराष्ट्रीय बाजार की नजर बनी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यहां तनाव और बढ़ता है, तो इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ सकता है।

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