नई दिल्ली। देश में एथनॉल मिश्रित E-20 पेट्रोल को लेकर विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। खुद को ‘E20 जनता पार्टी’ बताने वाले एक ऑनलाइन अभियान ने सरकार की एथनॉल मिश्रण नीति के खिलाफ 4 अगस्त को संसद मार्च का ऐलान किया है। अभियान को टैक्सी और परिवहन संगठनों का भी समर्थन मिलने का दावा किया जा रहा है।
अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि मौजूदा एथनॉल ब्लेंडिंग नीति में कई खामियां हैं। उनका आरोप है कि E-20 पेट्रोल से वाहनों का माइलेज प्रभावित होता है, इंजन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और रखरखाव का खर्च बढ़ जाता है। उन्होंने सरकार से नीति की समीक्षा करने और वाहन मालिकों को अपनी जरूरत के अनुसार ईंधन चुनने की स्वतंत्रता देने की मांग की है।
E0, E20 और E85 का विकल्प देने की मांग
अभियान की प्रमुख मांग है कि देशभर में E0 (शुद्ध पेट्रोल) भी उपलब्ध कराया जाए और उपभोक्ताओं को E0, E20 और E85 में से अपनी पसंद का ईंधन चुनने का विकल्प मिले। अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि किसी एक प्रकार के ईंधन को अनिवार्य रूप से लागू नहीं किया जाना चाहिए। उनका दावा है कि बेहतर नीति लागू होने पर पेट्रोल की कीमतें ₹80-90 प्रति लीटर तक लाई जा सकती हैं और किसानों के हितों का भी बेहतर संरक्षण संभव है।
4 अगस्त को संसद मार्च की तैयारी
दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ने भी 4 अगस्त को जंतर-मंतर से संसद तक मार्च करने की घोषणा की है। संगठन के अध्यक्ष संजय सम्राट के अनुसार, देशभर के टैक्सी, बस, टूरिस्ट वाहन संचालक, ट्रांसपोर्टर, ऑटो चालक और वाहन मालिक इस प्रदर्शन में शामिल होंगे। उनका कहना है कि एथनॉल मिश्रित ईंधन के कारण परिचालन लागत बढ़ी है, जिससे वाहन मालिक आर्थिक दबाव झेल रहे हैं।
सोशल मीडिया पर तेज हुआ अभियान
‘E20 जनता पार्टी’ के नाम से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और इंस्टाग्राम पर अभियान तेजी से चलाया जा रहा है। हालांकि, इस अभियान का अब तक कोई औपचारिक राजनीतिक संगठन या घोषित संस्थापक सामने नहीं आया है। फिलहाल इसे नागरिकों द्वारा शुरू किया गया एक डिजिटल अभियान माना जा रहा है। सोशल मीडिया पर इसके समर्थकों की संख्या लगातार बढ़ रही है और शुद्ध पेट्रोल उपलब्ध कराने तथा एथनॉल मिश्रण नीति में बदलाव की मांग जोर पकड़ रही है।
अभियान से जुड़े लोगों ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करने की मांग की है। वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करने, किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बहस और तेज होने की संभावना है।