कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में राजनीतिक उथल-पुथल लगातार बढ़ती जा रही है। पार्टी को एक और बड़ा झटका देते हुए राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे के साथ ही टीएमसी में बढ़ते असंतोष और अंदरूनी कलह की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।
बराइक से पहले टीएमसी के दो वरिष्ठ राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव भी उच्च सदन की सदस्यता और पार्टी से इस्तीफा दे चुके हैं। लगातार तीन बड़े नेताओं के इस्तीफे के बाद राज्यसभा में टीएमसी की संख्या घटकर 10 रह गई है, जिससे संसद में पार्टी की स्थिति कमजोर होती दिखाई दे रही है।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, पार्टी के भीतर असंतोष का दौर अभी खत्म नहीं हुआ है। चर्चा है कि आने वाले दिनों में तीन और राज्यसभा सांसद इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि इन अटकलों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इससे पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ गई है।
इस सप्ताह सुष्मिता देव ने सांसद पद और पार्टी दोनों से इस्तीफा देते हुए इसे अपना निजी फैसला बताया था। इससे पहले वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय ने भी टीएमसी और राज्यसभा से दूरी बना ली थी। गौरतलब है कि सुष्मिता देव वर्ष 2021 में कांग्रेस छोड़कर टीएमसी में शामिल हुई थीं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी के भीतर बगावत के स्वर तेज हो गए हैं। हाल ही में टीएमसी के 80 में से 65 विधायकों ने आधिकारिक टीएमसी विधायक दल से अलग होकर विधानसभा में मुख्य विपक्षी गुट के रूप में मान्यता प्राप्त की है। इस गुट का नेतृत्व निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं।
संकट अब विधानसभा से निकलकर संसद तक पहुंचता नजर आ रहा है। बागी सांसदों के समूह ने, काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में, 20 से अधिक लोकसभा सांसदों के समर्थन का दावा किया है। वहीं, सायनी घोष और माला रॉय जैसी सांसदों के भी बागी खेमे के साथ जुड़ने की खबरों ने टीएमसी नेतृत्व की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
लगातार हो रहे इस्तीफों और बढ़ती बगावत ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर की स्थिति किस दिशा में जाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।