बैन से पहले कंपनियों की नई चाल? 800 एमएल खाद्य तेल पाउच के दाम में उछाल

रायपुर। खाद्य तेल के कम वजन वाले पाउच पर प्रतिबंध लागू होने से पहले ही बाजार में कंपनियों की रणनीति का असर दिखाई देने लगा है। त्योहारी सीजन को देखते हुए कम वजन वाले पाउच का स्टॉक पहले से बाजार में उतारे जाने की बात सामने आ रही है। ऐसे में प्रतिबंध लागू होने के बाद भी उपभोक्ताओं को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद कम है।

बाजार में जहां कुछ कंपनियों ने एक लीटर वाले पाउच की सप्लाई शुरू नहीं की है, वहीं कुछ कंपनियां सीमित मात्रा में ही इसकी आपूर्ति कर रही हैं। इससे कम वजन वाले पाउच की बिक्री बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

पहले एक लीटर पैक पर था जोर

खाद्य तेल कंपनियां पहले मुख्य रूप से एक लीटर के पाउच बाजार में उपलब्ध कराती थीं। इसके अलावा पांच लीटर के डिब्बे और 15 लीटर या 15 किलो के टिन भी बाजार में मिलते हैं। बाद में कम आय वाले परिवारों की जरूरत को देखते हुए कम मात्रा वाले पाउच की अनुमति दी गई, ताकि उपभोक्ता अपनी जरूरत और बजट के अनुसार तेल खरीद सकें।

कम वजन के पाउच से बढ़ी प्रति लीटर कीमत

कम मात्रा वाले पाउच का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सुविधा देना था, लेकिन बाजार में इसका अलग असर दिखाई दे रहा है। अलग-अलग कंपनियों ने अपनी सुविधा के अनुसार पाउच का वजन तय किया, जिससे उपभोक्ताओं के लिए प्रति लीटर कीमत की सही तुलना करना मुश्किल हो गया। कम मात्रा में तेल खरीदने वाले ग्राहकों पर इसका अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।

हरेली का 800 एमएल पाउच 132 रुपए तक पहुंचा

बाजार में हरेली तेल का एक लीटर वाला पाउच बंद कर उसकी जगह 730 ग्राम यानी करीब 800 एमएल का पैक उपलब्ध कराया गया। शुरुआत में इस पैक की कीमत करीब 124 से 125 रुपए थी। बाद में कीमत बढ़कर 126 से 128 रुपए हुई और अब इसका खुदरा दाम करीब 132 रुपए तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है।

800 एमएल तेल के लिए 132 रुपए चुकाने पर इसकी प्रभावी कीमत करीब 165 रुपए प्रति लीटर बैठती है। इस तरह कम मात्रा वाला पैक उपभोक्ताओं को प्रति लीटर के हिसाब से महंगा पड़ रहा है।

कीर्ति गोल्ड से भी महंगा पड़ रहा हरेली

बाजार में उपलब्ध कीमतों के अनुसार कीर्ति गोल्ड सोया तेल का एक लीटर पैक थोक में करीब 150 रुपए और खुदरा बाजार में करीब 155 रुपए में बिक रहा है। ऐसे में 800 एमएल हरेली पाउच की प्रभावी प्रति लीटर कीमत इससे अधिक हो जाती है।

प्रतिबंध के बाद पुराने स्टॉक का क्या होगा?

कम वजन वाले पाउच पर प्रतिबंध से पहले कंपनियों द्वारा बाजार में बड़ी मात्रा में स्टॉक उतारे जाने की बात सामने आ रही है। ऐसे में नए नियम लागू होने के बाद भी पुराने पाउच कुछ समय तक बाजार में उपलब्ध रह सकते हैं। त्योहारी सीजन में खाद्य तेल की मांग बढ़ने के बीच उपभोक्ताओं को नए नियमों का लाभ तत्काल मिलने के बजाय पुराने स्टॉक के खत्म होने का इंतजार करना पड़ सकता है।

अब निगाह इस बात पर है कि प्रतिबंध लागू होने के बाद कंपनियां एक लीटर और उससे अधिक मात्रा वाले पाउच की सप्लाई कितनी तेजी से बढ़ाती हैं और इसका असर खाद्य तेल की कीमतों पर कितना पड़ता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *