दुर्ग। छह वर्षीय मासूम से दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या करने के मामले में दुर्ग की विशेष पॉक्सो अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने आरोपी सोमेश यादव (24) को दोषी करार देते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए इसे ‘विरलतम से विरलतम’ श्रेणी का मामला माना। आरोपी पर पॉक्सो अधिनियम की धारा 6(1) और भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत मृत्युदंड के साथ अर्थदंड भी लगाया गया है।
यह मामला मोहन नगर थाना क्षेत्र के अपराध क्रमांक 133/2025 से संबंधित है। 6 अप्रैल 2025 को 6 वर्ष 3 माह की बालिका के लापता होने की सूचना पुलिस को मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्काल तलाश शुरू की और मैदानी जांच के साथ तकनीकी संसाधनों की मदद से संभावित स्थानों पर पतासाजी की।
वाहन से बरामद हुई थी बालिका
तलाश के दौरान पुलिस टीम ने बालिका को एक वाहन से बरामद किया। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर पोस्टमार्टम सहित अन्य वैधानिक कार्रवाई शुरू की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित कर भौतिक, जैविक, चिकित्सकीय और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाए। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसके मेमोरेण्डम के आधार पर संबंधित वस्तुओं की बरामदगी भी की गई।
DNA और CCTV साक्ष्यों से मजबूत हुआ केस
विवेचना के दौरान आरोपी के कपड़ों, घटनास्थल से बरामद सामान और मृतिका से संबंधित जैविक नमूनों को सुरक्षित किया गया। मृतिका के कपड़े, स्वाब, बाल और नाखून सहित अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों को वैज्ञानिक परीक्षण के लिए भेजा गया।
आरोपी और संबंधित व्यक्तियों के DNA नमूने लेकर वैज्ञानिक जांच कराई गई। इसके अलावा घटनास्थल और आसपास के CCTV फुटेज तथा DVR भी जब्त किए गए। FSL और DNA रिपोर्ट समेत वैज्ञानिक साक्ष्यों को अभियोजन के मामले में महत्वपूर्ण आधार बनाया गया।
अदालत ने सुनाई अलग-अलग धाराओं में सजा
विशेष दाण्डिक प्रकरण क्रमांक 44/2025 में अपर सत्र न्यायाधीश, चतुर्थ एफटीएससी, विशेष न्यायालय (पॉक्सो), दुर्ग ने 10 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया।
न्यायालय ने आरोपी सोमेश यादव, निवासी ओम नगर, उरला, वार्ड-58, थाना मोहन नगर, दुर्ग को पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(ड), 5(ढ) सहपठित धारा 6(1) तथा भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 103(1), 65(2) और 238(क) के तहत दोषसिद्ध किया।
पॉक्सो अधिनियम की धारा 6(1) और बीएनएस की धारा 103(1) के तहत मृत्युदंड के साथ दोनों धाराओं में 5-5 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। वहीं धारा 238(क) के तहत आरोपी को पांच वर्ष के सश्रम कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। सभी सजाएं एक साथ भुगताई जाएंगी।
मृत्युदंड की पुष्टि की प्रक्रिया नियमानुसार छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के समक्ष होगी।
पुलिस टीम की रही अहम भूमिका
प्रकरण की त्वरित और प्रभावी विवेचना के लिए पुलिस अधीक्षक द्वारा विशेष टीम गठित की गई थी। टीम का नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पद्मश्री तंवर ने किया। थाना प्रभारी एवं विवेचक निरीक्षक शिव चंद्रा सहित मोहन नगर थाना पुलिस के अधिकारी-कर्मचारियों ने पतासाजी, साक्ष्य संरक्षण, आरोपी की गिरफ्तारी, FSL और DNA परीक्षण तथा न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक रूपवर्षा दिल्लीवार ने पैरवी की।
पीड़ित परिवार को 7 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति
न्यायालय ने मृतिका के परिजनों को राज्य सरकार की आहत प्रतिकर योजना के तहत 7 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति प्रदान करने का निर्देश दिया है।
दुर्ग पुलिस ने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में त्वरित कार्रवाई के साथ पीड़ित परिवार की संवेदनशीलता और बालिका की पहचान की गोपनीयता बनाए रखना प्राथमिकता है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि बच्चों की गुमशुदगी, संदिग्ध गतिविधि अथवा किसी अपराध की जानकारी मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचित करें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके और महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जा सके।