कोलकाता : कोलकाता में पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर उथल-पुथल में है। विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी को उस समय बड़ा झटका लगा जब पूर्व राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता डॉ. शांतनु सेन ने पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया।
अपने इस्तीफे में शांतनु सेन ने पार्टी की मौजूदा स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जब जनता ने टीएमसी को स्पष्ट रूप से नकार दिया है, तो वे प्रवक्ता के तौर पर काम जारी नहीं रख सकते। उन्होंने आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले और ‘कैश फॉर जॉब’ घोटाले का जिक्र करते हुए कहा कि इन विवादों ने जनता का भरोसा पार्टी से कमजोर किया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब चुनाव नतीजों के बाद टीएमसी के भीतर लगातार असंतोष और बगावत की खबरें आ रही हैं। इससे पहले बारासात की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने भी अपने सभी पदों से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी थी।
काकोली घोष दस्तीदार ने हाल ही में पार्टी के ही सांसद कल्याण बनर्जी पर लोकसभा में अनुशासनहीनता और अभद्र व्यवहार के आरोप लगाए, हालांकि कल्याण बनर्जी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है।
लगातार हो रहे इस्तीफों और आरोप-प्रत्यारोप के बीच टीएमसी की अंदरूनी स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं और पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है।