प्रिंट मीडिया को बड़ी राहत: सरकारी विज्ञापनों की नई दरों को मंजूरी

नई दिल्ली |  केंद्र सरकार ने प्रिंट मीडिया को राहत देते हुए सरकारी विज्ञापनों की दरों में 26% की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। नए संशोधन के तहत दैनिक समाचार पत्रों की एक लाख प्रतियों तक वाले वर्ग के लिए श्वेत-श्याम विज्ञापन की दर 47.40 रुपये से बढ़ाकर 59.68 रुपये प्रति वर्ग सेमी कर दी गई है। इसके साथ ही रंगीन विज्ञापनों के लिए प्रीमियम दरों तथा तरजीही श्रेणियों को लेकर समिति की सिफारिशों को भी हरी झंडी दे दी गई है।

2019 के बाद पहली बार बड़ा संशोधन

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत केंद्रीय संचार ब्यूरो (CBC) विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के प्रचार-प्रसार के लिए जिम्मेदार है। प्रिंट मीडिया में विज्ञापनों की दरों में पिछला संशोधन 9 जनवरी 2019 को 8वीं दर संरचना समिति की सिफारिशों पर किया गया था। यह दरें तीन साल के लिए मान्य थीं।

नई दरों पर विचार के लिए 9वीं दर संरचना समिति का गठन 11 नवंबर 2021 को किया गया था। इस समिति ने नवंबर 2021 से अगस्त 2023 के बीच कई चरणों में देशभर के प्रमुख समाचार पत्र संगठनों—INS, AISNA, SMBNS—और अन्य हितधारकों से सुझाव प्राप्त किए।

समिति ने व्यापक अध्ययन के बाद तैयार की सिफारिशें

समिति ने विज्ञापन दरों को प्रभावित करने वाले प्रमुख आर्थिक और संचालन संबंधी पहलुओं का गहराई से मूल्यांकन किया। इनमें शामिल थे—

  • न्यूजप्रिंट की कीमतों पर थोक मूल्य सूचकांक (WPI)
  • मजदूरी और मुद्रास्फीति दर
  • आयातित न्यूजप्रिंट के दामों में उतार-चढ़ाव
  • छपाई और प्रसंस्करण लागत

इन सभी बिंदुओं पर विचार करने के बाद समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट 23 सितंबर 2023 को सरकार को सौंपी।

राजस्व में बढ़ोतरी और प्रिंट मीडिया को नई ऊर्जा

सरकार का यह निर्णय प्रिंट मीडिया उद्योग को महत्वपूर्ण वित्तीय मजबूती प्रदान करेगा। पिछले कुछ वर्षों में न्यूजप्रिंट और अन्य कच्ची सामग्रियों की लागत में लगातार बढ़ोतरी से प्रिंट संस्थान दबाव में थे। नई दर संरचना उन्हें संचालन लागत संभालने, बेहतर पत्रकारिता के लिए संसाधन बढ़ाने और स्थानीय समाचार व्यवस्था को मजबूत करने में सहायता देगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम तेजी से बदलते मीडिया परिदृश्य में प्रिंट मीडिया के महत्व की पुनः पुष्टि करता है। सरकारी विज्ञापनों से मिलने वाली अतिरिक्त आय न सिर्फ संस्थानों को स्थिरता देगी, बल्कि सरकार को अपनी योजनाओं और संदेशों को अधिक प्रभावी ढंग से जनता तक पहुँचाने में भी सहायक होगी।

सरकार का यह फैसला प्रिंट मीडिया पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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