नई दिल्ली। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के अगले महीने भारत दौरे से पहले दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को लेकर अहम कूटनीतिक पहल हुई है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल इन दिनों बीजिंग में हैं, जहां उन्होंने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की। इस बैठक के बाद बुधवार, 26 अगस्त को भारत और चीन ने संयुक्त रूप से चर्चा के नतीजों की जानकारी दी।
विशेष प्रतिनिधियों (SR) के बीच हुई बातचीत में सीमा विवाद समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने सीमा प्रबंधन, वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC), सैन्य हॉटलाइन, व्यापार और नदियों से जुड़े सहयोग को लेकर आगे बढ़ने पर सहमति जताई है।
8 सूत्रीय समझौते में किन मुद्दों पर बनी सहमति?
बैठक के बाद सामने आए संयुक्त बयान के अनुसार भारत और चीन ने कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनाई है।
- सीमा निर्धारण की प्रक्रिया में जल्द और ठोस नतीजे हासिल करने के लिए बातचीत आगे बढ़ाई जाएगी।
- सीमा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त बैठक स्थलों और हॉटलाइन की व्यवस्था पर काम किया जाएगा।
- LAC को लेकर दोनों पक्षों की समझ को और बेहतर बनाने की कोशिश होगी।
- जमीनी स्तर पर पैदा होने वाली परिस्थितियों का समाधान राजनयिक और सैन्य माध्यमों से किया जाएगा।
- भारत-चीन के बीच सीमा-पार व्यापार को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।
- सीमा से जुड़ी नदियों के क्षेत्र में सहयोग का विस्तार किया जाएगा।
- सैन्य हॉटलाइन के दो अतिरिक्त चैनल स्थापित करने पर सहमति बनी है।
- दोनों देशों के बीच व्यापक सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा जारी रहेगी।
सीमा विवाद सुलझाने की दिशा में कितना बड़ा कदम?
भारत और चीन के बीच 2024 में हुई बातचीत के बाद अब उसके नतीजों को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। दोनों देश भारत-चीन सीमा के प्रबंधन को लेकर जल्द और ठोस नतीजे हासिल करने के उद्देश्य से बातचीत आगे बढ़ाने पर सहमत हुए हैं।
संयुक्त बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि आगे की प्रक्रिया में दोनों पक्षों के लिए सबसे पहले अपने-अपने कार्य-क्षेत्र पर सहमति बनाना जरूरी होगा।
पिछले साल दोनों देशों ने सीमा निर्धारण से जुड़े मुद्दों पर जल्द परिणाम हासिल करने के तरीकों का पता लगाने के लिए भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र (WMCC) के तहत एक विशेषज्ञ समूह बनाने पर सहमति जताई थी। इस बार संयुक्त बयान में ‘जल्द और ठोस नतीजे’ जैसी भाषा का इस्तेमाल किया गया है, जिसे सीमा वार्ता को आगे बढ़ाने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
LAC पर तनाव कम करने की कोशिश
विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों पक्षों ने जमीनी स्तर पर किसी भी स्थिति का समाधान मौजूदा राजनयिक और सैन्य माध्यमों के जरिए करने पर सहमति जताई है। इसका उद्देश्य सीमा पर तनाव की स्थिति को बातचीत के जरिए नियंत्रित करना और भविष्य में टकराव की संभावनाओं को कम करना है।
इसके साथ ही दोनों देशों ने सीमा प्रबंधन से जुड़े तंत्र को मजबूत करने और संपर्क व्यवस्था बढ़ाने पर भी जोर दिया है। सैन्य हॉटलाइन के दो नए चैनल स्थापित करने की सहमति इसी दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर भी चर्चा
बैठक में सीमा-पार सहयोग में हुई प्रगति पर भी चर्चा हुई। भारतीय पक्ष ने चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में होने वाली कैलाश-मानसरोवर यात्रा के लिए भारतीय आधिकारिक तीर्थयात्री जत्थों की संख्या बढ़ाने की दिशा में चीनी पक्ष की ओर से किए गए प्रयासों की सराहना की।
इस घटनाक्रम को दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा तनाव के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की व्यापक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
शी चिनफिंग के भारत दौरे से पहले अहम घटनाक्रम
अजीत डोभाल और वांग यी के बीच हुई बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के अगले महीने भारत आने की उम्मीद है। ऐसे में सीमा विवाद पर हुई यह सहमति दोनों देशों के रिश्तों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हालांकि, 8 सूत्रीय सहमति का मतलब सीमा विवाद का अंतिम समाधान नहीं है। वास्तविक सीमा निर्धारण और LAC से जुड़े जटिल मुद्दों पर आगे भी लंबी बातचीत की जरूरत होगी। लेकिन संवाद, सैन्य संपर्क और सीमा प्रबंधन को मजबूत करने पर बनी सहमति दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम जरूर है।