- पीयूष मिश्रा बोले- ईओडब्ल्यू में दर्ज कराएंगे एफआईआर, 1.5 करोड़ बकाया रहते आयुक्त ने लुटाया पैसा
भिलाई, 30 मई: नगर निगम भिलाई में सफाई ठेकेदार मेसर्स पीवी रमन पर मेहरबानी का मामला तूल पकड़ गया है। भाजपा के वरिष्ठ पार्षद पीयूष मिश्रा ने आर्थिक अनियमितता का आरोप लगाते हुए कहा कि निगमायुक्त राजीव कुमार पांडेय ने 1.5 करोड़ की बकाया देनदारी के बावजूद डिफाल्टर ठेकेदार को 13 लाख रुपए का भुगतान कर दिया। उन्होंने पूरे प्रकरण की शिकायत आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) में कर आयुक्त के खिलाफ अपराध दर्ज कराने की बात कही है।
पीयूष मिश्रा ने कहा, “यह विशुद्ध रूप से आर्थिक अपराध का प्रकरण है। सफाई कामगारों के पीएफ-ईएसआई के करोड़ों डकारने वाले ठेकेदार को निगमायुक्त बचा रहे हैं। हम न्यायालय भी इस प्रकरण को लेकर जाएंगे।”
4 आयुक्तों की रोक के बाद भी भुगतान
ठेका दिसंबर 2022 में समाप्त हुए तीन साल बीत चुके हैं। पूर्व आयुक्त आईएएस रोहित व्यास, देवेश ध्रुव, लोकेश चंद्राकर और बजरंग दुबे ने ठेकेदार के भुगतान पर सख्त रोक लगा रखी थी। इसके बावजूद 25 मार्च को सामान्य सभा में आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव पारित होने के दिन ही 13 लाख रुपए सिविक सेंटर स्थित ठेकेदार के नए खाते में ट्रांसफर कर दिए गए। ईपीएफओ ने रमन के अन्य बैंक खाते सीज कर रखे हैं। 18 लाख रुपए और देने की फाइल भी तैयार है।
कैसे बना 1.5 करोड़ का बकाया
निगम ने अप्रैल 2021 से दिसंबर 2022 तक शहर की सफाई का ठेका पीवी रमन को दिया था, जिसे जनवरी-फरवरी 2023 तक बढ़ाया गया। वेतन न मिलने पर हड़ताल हुई तो निगम ने सीधे वेतन दिया और ठेकेदार के बिल से 2.73 करोड़ की कटौती की।
दिसंबर 2022 तक कुल बिल 5.36 करोड़ था। शेष 2.62 करोड़ में से ईपीएफ आयुक्त ने सीधे खाते से 1.78 करोड़ काट लिए। निगम ने 25 लाख अलग से जमा किए। इसके बाद ठेकेदार का बकाया 59 लाख बचा।
एक्सटेंशन में हुआ असली खेल
जनवरी-फरवरी 2023 के कर्मचारियों का करीब 1 करोड़ पीएफ और अप्रैल 2021 से फरवरी 2023 तक का 50-60 लाख ईएसआई आज तक जमा नहीं हुआ। इस तरह ठेकेदार पर कुल 1.5 करोड़ की देनदारी बनती है।
एक घंटे में तीन अफसरों के साइन
25 मार्च को सामान्य सभा में आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव पारित हुआ। उसी दिन एक घंटे के भीतर स्वास्थ्य अधिकारी, आयुक्त और लेखा अधिकारी के हस्ताक्षर से 13 लाख जारी हो गए।
दो ईपीएफ खाते खोलकर गुमराह किया
दस्तावेजों में ‘PERI VENKAT RAMAN’ के नाम से दो अलग ईपीएफ कोड CGRA1132021900 और CGRA12611715000 मिले हैं। संस्था ने कामगारों की पीएफ राशि दो खातों में जमा कर निगम को गुमराह किया। इसे पीएफ गबन मानकर एफआईआर दर्ज करने और संस्था को काली सूची में डालने की चेतावनी दी गई थी।
निगम के खजाने को नुकसान
नियमानुसार मुख्य नियोक्ता होने के नाते पीएफ-ईएसआई जमा कराने की कानूनी जिम्मेदारी निगम की है। पार्षद मिश्रा का आरोप है कि बकाया वसूलने के बजाय भुगतान कर निगमायुक्त ने खजाने को सीधा नुकसान पहुंचाया है। मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है।