नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) को मंजूरी दे दी है। ₹62,500 करोड़ के बजट वाली इस योजना का उद्देश्य भारत में मोबाइल फोन निर्माण को बढ़ावा देना, घरेलू स्तर पर पुर्जों के उत्पादन को मजबूत करना, सप्लाई चेन को सशक्त बनाना और भारतीय मोबाइल ब्रांडों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।
सरकार के अनुसार, यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए लागू रहेगी। इसके तहत भारत में मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियों को पात्र बिक्री (Eligible Sales) पर 2.25 प्रतिशत से 5 प्रतिशत तक प्रोत्साहन (इंसेंटिव) दिया जाएगा। वहीं, यदि कंपनियां मोबाइल फोन के प्रमुख पुर्जे और सब-असेंबली भारत से खरीदती हैं तो उन्हें 1.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा। भारतीय ब्रांडों को डिजाइन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) के लिए पात्र बिक्री पर 3 प्रतिशत अतिरिक्त इंसेंटिव प्रदान किया जाएगा।
सरकार का अनुमान है कि इस योजना के दौरान देश में मोबाइल फोन का कुल उत्पादन करीब ₹39 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है। साथ ही मोबाइल फोन के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि और लगभग 60,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है।
केंद्र सरकार ने बताया कि ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत वित्त वर्ष 2014-15 के बाद से इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में सात गुना और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में 11 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। यह क्षेत्र युवाओं, विशेषकर ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों के लोगों के लिए रोजगार का बड़ा माध्यम बनकर उभरा है।
सरकार के मुताबिक, देश में उपयोग होने वाले 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन अब भारत में ही निर्मित किए जा रहे हैं। वर्ष 2025 में स्मार्टफोन भारत का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद बनकर उभरा, जिसने डीजल ईंधन और कटे-तराशे हीरों जैसे पारंपरिक निर्यात उत्पादों को भी पीछे छोड़ दिया।
सरकार का कहना है कि मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS), प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI-LSEM) योजना के बाद अगला महत्वपूर्ण कदम है। नई योजना से मोबाइल निर्माण, निर्यात, घरेलू वैल्यू एडिशन और भारतीय कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।