नई दिल्ली — अब मोबाइल पर आने वाली कॉल्स और भी सुरक्षित होंगी। दूरसंचार कंपनियों ने “कॉलर नेम प्रेजेंटेशन” (CNAP) फीचर का परीक्षण शुरू कर दिया है, जिसके तहत कॉल उठाने से पहले ही कॉल करने वाले व्यक्ति का नाम फोन स्क्रीन पर दिखेगा। इससे यूज़र्स को यह जानने में आसानी होगी कि किसका कॉल आ रहा है — और फर्जी या धोखाधड़ी वाली कॉल से बचाव संभव हो सकेगा।
सूत्रों के मुताबिक, वोडाफोन आइडिया ने हरियाणा सर्कल में पायलट टेस्टिंग शुरू कर दी है, जबकि जियो भी जल्द ही इसी सर्कल में परीक्षण शुरू करने जा रही है। ट्रायल सफल रहने पर दूरसंचार विभाग देशभर में 31 मार्च 2026 तक इस सुविधा को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी में है।
ट्राई और सरकार की सहमति
फरवरी 2024 में ट्राई (TRAI) ने सुझाव दिया था कि CNAP सेवा केवल उन उपभोक्ताओं को दी जाए जो इसे लेना चाहें। लेकिन दूरसंचार विभाग ने सुरक्षा कारणों से इसे सभी उपयोगकर्ताओं के लिए स्वतः सक्रिय करने का प्रस्ताव दिया। अब ट्राई ने भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
साइबर अपराधों पर लगेगी लगाम
अधिकारियों के अनुसार, CNAP फीचर से वित्तीय धोखाधड़ी, फर्जी कॉल और डिजिटल गिरफ्तारी जैसे अपराधों में कमी आने की उम्मीद है। हालांकि यह सेवा केवल 4G और 5G नेटवर्क पर उपलब्ध होगी, क्योंकि 2G और 3G नेटवर्क में तकनीकी सीमाएं हैं।
CLIR सुविधा पर भी विचार
सरकार ट्राई की एक अन्य सिफारिश पर भी विचार कर रही है — जिसके तहत “कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेशन रेस्ट्रिक्शन (CLIR)” सुविधा लेने वाले ग्राहकों के नाम स्क्रीन पर नहीं दिखाए जाएंगे।
उपभोक्ताओं को मिलेगा विकल्प
ट्राई ने हाल ही में यह भी स्पष्ट किया है कि CNAP सुविधा सभी उपयोगकर्ताओं के लिए डिफॉल्ट रूप से सक्रिय रहेगी, लेकिन अगर कोई उपभोक्ता इसे बंद करना चाहे, तो उसे यह विकल्प दिया जाएगा।
यह कदम न केवल डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि कॉल फ्रॉड और स्पैम कॉल से लोगों को राहत भी देगा।