रायपुर/पलक्कड़।केरल के पलक्कड़ जिले में छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले से गए एक प्रवासी श्रमिक की हत्या ने अब गंभीर राजनीतिक और प्रशासनिक मोड़ ले लिया है। घटना के बाद पीड़ित परिवार द्वारा उठाई गई मांगों पर केरल प्रशासन ने सहमति जता दी है, वहीं छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी इस मुद्दे को लेकर हलचल तेज हो गई है।
पत्नी ने उठाई न्याय की आवाज
मृतक रामनारायण बघेल की पत्नी ललिता बघेल ने हत्या के बाद केरल पहुंचकर जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई थी। उन्होंने पलक्कड़ कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई, निष्पक्ष जांच और आर्थिक सहायता की मांग रखी थी। परिजनों का कहना था कि यह कोई सामान्य मारपीट नहीं, बल्कि भीड़ द्वारा की गई निर्मम हत्या है।
प्रशासन और परिवार में बनी सहमति
त्रिशूर जिला कलेक्ट्रेट में केरल सरकार, राजस्व मंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में हुई अहम बैठक के बाद पीड़ित परिवार की मांगों को लेकर सहमति बनी।
बैठक में तय किया गया कि—
- मामले में मॉब लिंचिंग की धाराएं और SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया जाएगा।
- घटना की निष्पक्ष जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित की जाएगी।
- मुआवजे की राशि पर अंतिम निर्णय केरल कैबिनेट की बैठक में लिया जाएगा, जिसकी संभावित राशि 10 लाख रुपये से अधिक हो सकती है।
- मृतक का पार्थिव शरीर छत्तीसगढ़ लाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में उबाल
इस घटना को लेकर छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने इसे मानवता को शर्मसार करने वाली घटना बताते हुए कहा कि केवल संदेह के आधार पर एक निर्दोष प्रवासी मजदूर को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला।
महंत ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि राज्य सरकार पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए केरल सरकार से समन्वय करे और यह स्पष्ट संदेश दे कि छत्तीसगढ़ अपने नागरिकों की सुरक्षा के प्रति गंभीर है, चाहे वे देश के किसी भी हिस्से में हों।
क्या है पूरा मामला
जानकारी के मुताबिक, 17 दिसंबर को 31 वर्षीय रामनारायण बघेल, जो रोज़गार के सिलसिले में केरल के पलक्कड़ जिले में रह रहा था, उसे कुछ लोगों ने बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में घेर लिया। इसके बाद युवक के साथ बेरहमी से मारपीट की गई। गंभीर चोटों के चलते इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
न्याय की ओर एक कदम
प्रशासन की सहमति के बाद पीड़ित परिवार को अब न्याय की उम्मीद जगी है। हालांकि परिजन साफ कह रहे हैं कि जब तक दोषियों को सख्त सजा नहीं मिलती और सरकार की ओर से ठोस सहायता नहीं दी जाती, तब तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी।