CG High Court ने नान घोटाले की सीबीआई जांच याचिकाएं की खारिज, न्यायालय में आवेदन का खुला रास्ता

रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2015 के चर्चित नान घोटाले की सीबीआई जांच कराने से जुड़ी याचिकाओं को शुक्रवार को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जिन लोगों के खिलाफ एसीबी ने चालान नहीं किया, उनके मामले में अब विचारण न्यायालय में धारा 319 के तहत आवेदन किया जा सकता है।

सुनवाई का सार

विशेष खंडपीठ, चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस पीपी साहू, ने नान घोटाले से जुड़ी 8 याचिकाओं की सुनवाई की। जिन याचिकाओं में अधिवक्ता या याचिकाकर्ता उपस्थित नहीं हुए, उन्हें निरस्त कर दिया गया। भाजपा नेता धरमलाल कौशिक द्वारा एसआईटी जांच के खिलाफ दाखिल याचिका को भी वापस लेने की अनुमति दी गई।

सुनवाई के दौरान हमर संगवारी एनजीओ और अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव की ओर से दो याचिकाओं पर ही पक्ष मौजूद था। राज्य सरकार के पक्ष में वर्चुअली जुड़े अधिवक्ता अतुल झा ने बताया कि ट्रायल कोर्ट में अब तक 170 गवाहों की गवाही हो चुकी है और मामला अंतिम चरण में है।

अधूरी जांच और आवेदन का विकल्प

अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि एसीबी ने कई सीधे तौर पर जुड़े आरोपियों को छोड़ दिया, जिनमें मुनीश कुमार शाह भी शामिल हैं, जिन्होंने जहरीला नमक सप्लाई किया था। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में विचारण न्यायालय में धारा 319 के तहत आवेदन कर जांच एजेंसी की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकती है।

नागरिक आपूर्ति निगम (नान) पर यह जिम्मेदारी थी कि छत्तीसगढ़ में राशन और अन्य आवश्यक वस्तुओं का वितरण सुचारू रूप से हो। 2011 की जनसंख्या के अनुसार, राज्य में 55 लाख परिवार होने के बावजूद 70 लाख राशन कार्ड बनाए गए, जिससे हजारों करोड़ रुपए के राशन घोटाले के आरोप लगे। इस मामले में आईएएस अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला को गिरफ्तार भी किया गया।

कोर्ट का तर्क

हाईकोर्ट ने कहा कि मामला 10 साल से अधिक पुराना है और जांच एजेंसी बदलने की मांग अब उचित नहीं है। इसलिए सभी जनहित याचिकाओं को खारिज कर दिया गया। अब केवल विचारण न्यायालय में उचित आवेदन के माध्यम से ही कार्रवाई संभव है।

इस फैसले के बाद नान घोटाले की जांच का फोकस अब मौजूदा चालान और विचारण पर रहेगा, जबकि सीबीआई जांच की मांग पूरी तरह निरस्त हो गई।

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