मुश्किल में बदला रुख! पहले विदेशी मदद ठुकराई, अब भारत-चीन से सहायता मांग रहा देश

नई दिल्ली। नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। आपदा के बाद विदेशी खोज और बचाव टीमों की मदद लेने से इनकार करने वाली नेपाल सरकार ने अब अपना रुख बदल दिया है। अंतरराष्ट्रीय दबाव और बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों के लापता होने के बाद नेपाल ने भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया से सीमित तकनीकी मदद लेने को मंजूरी दी है।

नेपाल सरकार के इस फैसले के बाद भारत ने तेजी से राहत-बचाव अभियान शुरू कर दिया है। भारत की तकनीकी टीम काठमांडू पहुंच चुकी है, जबकि भारतीय वायु सेना भी राहत सामग्री पहुंचाने में जुटी है।

भारत ने भेजी 10 टन राहत सामग्री

भारत ने नेपाल को मानवीय सहायता के तहत दवाइयां, खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी सामान समेत 10 टन राहत सामग्री भेजी है। भारतीय वायु सेना का सी-130 विमान राहत सामग्री लेकर नेपाल पहुंचा।

भारत की ओर से टनल रेस्क्यू टीम, मेडिकल टीम और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीम भेजने की भी पेशकश की गई है। भारत ने संकट की इस घड़ी में नेपाल को हरसंभव सहायता देने का भरोसा जताया है।

पहले विदेशी टीमों को अनुमति देने से किया था इनकार

नेपाल सरकार ने 26 जून को कहा था कि उसके अपने बचावकर्मी खोज और बचाव अभियान संभालने में सक्षम हैं और विदेशी सर्च एंड रेस्क्यू टीमों को अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, बाढ़ में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों के लापता होने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बढ़ने के बाद सरकार ने अपना फैसला बदल दिया।

अब नेपाल ने डीएनए टेस्ट, फॉरेंसिक जांच, सुरंग बचाव और तकनीकी विशेषज्ञता जैसे क्षेत्रों में सीमित अंतरराष्ट्रीय सहायता लेने का निर्णय किया है।

चार देशों की विशेषज्ञ टीमें पहुंचेंगी

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन केंद्र के आकलन के आधार पर नेपाल ने भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया की विशेषज्ञ टीमों को काठमांडू भेजने की अनुमति दी है। इन टीमों के पास सुरंग बचाव, डीएनए जांच और फॉरेंसिक जांच का अनुभव है।

इन विशेषज्ञों को खासतौर पर रसुवा और नुवाकोट जिलों में हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों के अंदर फंसे लोगों को तलाशने और बचाने के अभियान में लगाया जाएगा। बाढ़ से इन दोनों जिलों में कुल 14 पनबिजली परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं।

बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक लापता

नेपाल में आई बाढ़ से भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के किनारे बसे इलाकों में भारी नुकसान हुआ है। बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों के लापता होने से दूसरे देशों की चिंता भी बढ़ गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 31 देशों के 517 विदेशी नागरिक लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें भारतीय नागरिकों की संख्या सबसे अधिक है।

चीन-नेपाल सीमा के पास अचानक आई बाढ़ में कई तीर्थयात्रियों के भी लापता होने की खबर है। नेपाल के विदेश मंत्री ने कहा है कि जिन तकनीकी क्षेत्रों में देश के पास विशेषज्ञता की कमी है, वहां अंतरराष्ट्रीय मदद की जरूरत है।

नेपाल में मौतों और लापता लोगों का आंकड़ा बढ़ा

भीषण बाढ़ और उसके बाद आए विनाशकारी हालात में मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। उपलब्ध अपडेट के मुताबिक, 626 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,500 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

इस आपदा में बड़ी संख्या में भारतीय भी प्रभावित हुए हैं। करीब 320 भारतीयों समेत भारतीय मूल के करीब 100 लोगों से संपर्क नहीं हो पाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, तिब्बत में मौजूद करीब 400 भारतीयों से संपर्क हो चुका है और उनके सुरक्षित होने की खबर है।

नारायणी नदी से बरामद हुए शव

बाढ़ के बाद राहत और तलाशी अभियान के दौरान नदियों से लगातार शव बरामद किए जा रहे हैं। पुलिस के मुताबिक, नवलपरासी पूर्व से होकर बहने वाली नारायणी नदी के अलग-अलग इलाकों से शुक्रवार शाम तक 158 शव बरामद किए गए थे, जबकि इसके बाद 48 और शव मिलने की जानकारी सामने आई है।

नदी किनारे मिले शवों को विभिन्न अस्पतालों और वन कार्यालयों के भवनों में सुरक्षित रखा गया है। कुछ शव अभी भी नदी किनारे मौजूद हैं, जिन्हें सुरक्षित स्थान पर लाने की तैयारी की जा रही है।

ऐसे में नेपाल सरकार के रुख में बदलाव के बाद अब भारत समेत चार देशों की विशेषज्ञ टीमें राहत, बचाव और पहचान संबंधी कार्यों में मदद करेंगी। भारत की ओर से भेजी गई राहत सामग्री और तकनीकी सहायता नेपाल में जारी बचाव अभियान को और मजबूती देने की उम्मीद है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *