Chhath Puja 2025 Calendar: दिवाली के छठे दिन से शुरू होगी सूर्योपासना, जानिए पर्व का महत्व और पूरा व्रत क्रम

Chhath Puja 2025 Calendar: दीपावली के छठे दिन मनाया जाने वाला छठ पर्व सूर्य उपासना का सबसे बड़ा लोक पर्व है। इसे सूर्य षष्ठी व्रत भी कहा जाता है। साल में यह दो बार मनाया जाता है — चैत्र मास और कार्तिक मास में। चैत्र शुक्ल षष्ठी को मनाए जाने वाले पर्व को चैती छठ कहा जाता है, जबकि कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाया जाने वाला पर्व कार्तिक छठ कहलाता है।

यह पर्व परिवार की सुख-समृद्धि, संतान प्राप्ति और मनोकामना पूर्ति के लिए किया जाता है। महिलाएं ही नहीं, पुरुष भी पूरे नियम और श्रद्धा से इस व्रत को करते हैं। छठ व्रत अत्यंत कठिन माना जाता है, जिसमें उपवास, तप और संयम का पालन किया जाता है। व्रती जमीन पर चादर या कंबल बिछाकर विश्राम करते हैं और पूरे पर्व के दौरान सात्विक जीवन शैली अपनाते हैं।

छठ पूजा 2025 का पूरा व्रत क्रम

25 अक्टूबर 2025 (शनिवार) – नहाय-खाय
इस दिन व्रतधारी स्नान कर पवित्रता के साथ लौकी-चना दाल और चावल को घी में पकाकर ग्रहण करते हैं। इसी दिन से छठ व्रत की शुरुआत होती है।

26 अक्टूबर 2025 (रविवार) – लोहंडा और खरना
दूसरे दिन पूरे दिन निराहार रहने के बाद शाम को व्रती गुड़ की खीर और रोटी से प्रसाद बनाकर भगवान सूर्य को अर्पित करते हैं। इसके बाद वही प्रसाद ग्रहण किया जाता है।

27 अक्टूबर 2025 (सोमवार) – संध्या अर्घ्य
तीसरे दिन व्रती सूर्यास्त के समय जलाशय या नदी में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं। इस दिन घाटों पर लाखों भक्तों की भीड़ उमड़ती है।

 28 अक्टूबर 2025 (मंगलवार) – उषा अर्घ्य और पारण
अंतिम दिन सुबह सूर्योदय से पहले नदी या तालाब के किनारे व्रती उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं और परिवार की सुख-शांति तथा समृद्धि की कामना करते हैं। इसके बाद व्रत का समापन पारण के साथ होता है।

सूर्यास्त और सूर्योदय का समय

  • 27 अक्टूबर 2025 (सोमवार): सूर्यास्त शाम 5:40 बजे
  • 28 अक्टूबर 2025 (मंगलवार): सूर्योदय सुबह 6:30 बजे

पूजन सामग्री और परंपराएं

छठ मईया की पूजा में गन्ना, नींबू, नारियल, अमरूद, शरीफा, केला, संतरा, सुपारी, हल्दी, सुथनी, शकरकंद, कपूर, चंदन, मिठाई, ठेकुआ, पुआ और गुड़ के लड्डू चढ़ाए जाते हैं।
अर्घ्य देने के लिए बांस या पीतल की सूप या टोकरी का उपयोग किया जाता है। व्रती नदी या पोखरे में कमर तक जल में खड़े होकर सूर्य को जल अर्पित करते हैं और संपूर्ण जगत के कल्याण की कामना करते हैं।

छठ पूजा की परंपरा तब तक निभाई जाती है जब तक अगली पीढ़ी की कोई विवाहित महिला इसे आगे न बढ़ा दे। यह पर्व भक्ति, आस्था और अनुशासन का अनोखा संगम है, जो लोक और आध्यात्म का सुंदर मेल प्रस्तुत करता है।

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