कोलकाता। बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन छोड़ने की अपील को लेकर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कांग्रेस की पश्चिम बंगाल इकाई ने धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए FIR दर्ज करने और गिरफ्तारी की मांग की है।
कांग्रेस का आरोप है कि धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी से बंगाली समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाएं आहत हुई हैं। पार्टी ने इसे राज्य के सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करने वाला बयान बताया है।
हावड़ा के कार्यक्रम में टिप्पणी का आरोप
दक्षिण कोलकाता जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रदीप प्रसाद ने कोलकाता के भवानीपुर थाने में लिखित शिकायत दी है। कांग्रेस के मुताबिक, 5 सितंबर को हावड़ा में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने बंगाली समुदाय की खान-पान परंपराओं को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहार करने वाले श्रद्धालुओं को कथित तौर पर ‘पाखंडी’ और ‘ढोंगी’ कहा। कांग्रेस ने पुलिस से मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
टीएमसी ने कहा- खान-पान व्यक्तिगत पसंद
विवाद बढ़ने के बाद राज्य की राजनीति में भी बयानबाजी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहार का सेवन कोई नई बात नहीं है। उन्होंने बंगाल की पुरानी धार्मिक परंपराओं का हवाला देते हुए कहा कि शक्ति पूजा के दौरान बलि और प्रसाद ग्रहण करने की परंपरा भी रही है।
मंत्री ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति का खान-पान उसकी व्यक्तिगत पसंद है और किसी को यह तय करने का अधिकार नहीं होना चाहिए कि दूसरा व्यक्ति क्या खाए।
BJP ने बयान से बनाई दूरी
विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने भी धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी से दूरी बनाते हुए इसे उनका निजी विचार बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि संत अपने धार्मिक और सात्विक विचारों के आधार पर शाकाहार की बात कर सकते हैं, लेकिन किसी की व्यक्तिगत खान-पान की पसंद पर इसे थोपना उचित नहीं है।
फिलहाल धीरेंद्र शास्त्री के बयान को लेकर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस ने जहां पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग की है, वहीं इस पूरे विवाद ने बंगाली संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और व्यक्तिगत खान-पान की स्वतंत्रता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।