Dhanvantari Puja: भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का जनक और स्वास्थ्य का देवता कहा गया है। वे समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश के साथ प्रकट हुए थे, इसलिए इन्हें अमृत और जीवनदायिनी ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। धनतेरस के दिन इनकी पूजा करने से शरीर और मन दोनों को शांति और बल मिलता है। ऐसा विश्वास है कि जो व्यक्ति इस दिन धन्वंतरि भगवान की उपासना करता है, उसके जीवन से रोग, कष्ट और दरिद्रता दूर होती है तथा घर में आरोग्य, ऐश्वर्य और शुभता का वास होता है।
धनतेरस पर धन्वंतरि पूजन विधि
- स्थान की शुद्धि: प्रातः स्नान कर घर के पूजास्थल को स्वच्छ करें और पीले या लाल वस्त्र बिछाकर भगवान धन्वंतरि की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- पूजा सामग्री: गंगाजल, फूल, अक्षत (चावल), दीपक, धूप, तुलसी पत्ते और आयुर्वेदिक औषधियां जैसे हल्दी, तुलसी, गिलोय आदि रखें।
- पूजन प्रक्रिया: भगवान धन्वंतरि को पुष्प, धूप और दीप अर्पित करें।
- मंत्र जाप: श्रद्धा से “ॐ श्री धन्वंतरये नमः” मंत्र का 108 बार जप करें।
- आरोग्य प्रार्थना: परिवार के स्वास्थ्य, दीर्घायु और सुख-शांति के लिए ध्यान लगाकर प्रार्थना करें।
- सेवा और दान: इस दिन जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या औषधि दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
धन्वंतरि पूजन के लाभ
- आरोग्य, मानसिक शांति और ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
- घर में समृद्धि, धन और सौभाग्य का प्रवाह बढ़ता है।
- रोगों, तनाव और नकारात्मकता से मुक्ति मिलती है।
- परिवार में प्रेम, सौहार्द और खुशहाली बनी रहती है।
धनतेरस का यह दिन न केवल धन प्राप्ति का प्रतीक है, बल्कि यह जीवन में स्वास्थ्य और संतुलन स्थापित करने का दिव्य अवसर भी है। भगवान धन्वंतरि की कृपा से तन, मन और घर – तीनों में सुख-समृद्धि का वास होता है।