नई दिल्ली। भारतीय रिकर्व तीरंदाज धीरज बोम्मादेवरा ने रविवार को शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया। उन्होंने वर्ल्ड कप फाइनल में जापान के नाकानिशी जुन्या को शूट-ऑफ में हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके साथ ही धीरज वर्ल्ड कप फाइनल में व्यक्तिगत रिकर्व वर्ग का गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष तीरंदाज बन गए।
दुनिया के नंबर-10 तीरंदाज धीरज ने फाइनल में दुनिया के नंबर-20 नाकानिशी को बेहद रोमांचक मुकाबले में 6-5 से हराया। पांच सेट के बाद दोनों खिलाड़ी 5-5 की बराबरी पर थे। इसके बाद शूट-ऑफ में धीरज ने 10 अंक का निशाना लगाया, जबकि जापानी तीरंदाज 9 अंक ही हासिल कर सके। इस तरह धीरज ने 10-9 से शूट-ऑफ जीतकर स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया।
धीरज ने क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल में भी शानदार प्रदर्शन किया था। इससे पहले वह 2023 और 2024 के वर्ल्ड कप फाइनल में पदक जीतने से चूक गए थे। इस बार उन्होंने दबाव के बीच शानदार वापसी करते हुए खिताब अपने नाम किया।
इस जीत के साथ धीरज ने वर्ल्ड कप फाइनल में भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाज के पदक का 16 साल लंबा इंतजार भी खत्म कर दिया। इससे पहले जयंत तालुकदार ने 2010 में एडिनबर्ग में आयोजित वर्ल्ड कप फाइनल में कांस्य पदक जीता था।
वर्ल्ड कप फाइनल में व्यक्तिगत रिकर्व वर्ग का गोल्ड जीतने वाले धीरज भारत के दूसरे तीरंदाज हैं। उनसे पहले डोला बनर्जी ने 2007 में दुबई में महिलाओं का व्यक्तिगत खिताब जीता था। वहीं दीपिका कुमारी इस प्रतियोगिता में भारत की सबसे सफल तीरंदाज हैं, जिन्होंने पांच सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल जीता है।
फाइनल में नाकानिशी ने शुरुआत में धीरज पर दबाव बनाया और 3-1 की बढ़त हासिल कर ली थी। धीरज ने तीसरे सेट में 29 अंक हासिल कर स्कोर बराबर किया। चौथे सेट में जापानी खिलाड़ी ने फिर बढ़त बनाते हुए स्कोर 5-3 कर दिया। पांचवें सेट में धीरज ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मुकाबला 5-5 पर पहुंचाया और फिर शूट-ऑफ में बाजी मार ली।
अब धीरज आगामी एशियन गेम्स की तैयारी के लिए रवाना होंगे, जहां वह भारत की रिकर्व टीम की अगुवाई करेंगे। हांग्जो एशियन गेम्स में उन्होंने टीम स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता था।