नई दिल्ली। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और ईंधन की लागत के बीच डीजल में बायोडीजल मिलाने को लेकर चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियां कुछ चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर डीजल में 5 प्रतिशत तक बायोडीजल का मिश्रण इस्तेमाल कर रही हैं। हालांकि, इस दावे और इसकी मौजूदा स्थिति की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों ने डीजल के खुदरा दाम स्थिर रखे हैं। इससे कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में बायोडीजल को वैकल्पिक ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने पर जोर दिया जा रहा है।
चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर मिश्रण का दावा
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, गुजरात, राजस्थान और दिल्ली-एनसीआर के कुछ पेट्रोल पंपों पर डीजल में 5 प्रतिशत तक बायोडीजल मिलाए जाने की बात कही गई है। हालांकि, इन स्थानों पर इसकी उपलब्धता और वास्तविक मिश्रण की मात्रा की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बायोडीजल वनस्पति तेल, सोयाबीन और पाम ऑयल सहित इस्तेमाल किए जा चुके कुकिंग ऑयल जैसे स्रोतों से बनाया जा सकता है। इसे निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार पारंपरिक डीजल के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है।
तेल कंपनियों पर बढ़ती लागत का दबाव
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं, कुछ निजी कंपनियों की ओर से ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की खबरें भी सामने आई हैं। सरकारी कंपनियों को पेट्रोल पर 8 रुपये और डीजल पर 9 रुपये प्रति लीटर तक घाटा होने के आंकड़े भी बताए गए हैं, लेकिन इनकी आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
रिपोर्ट में दिल्ली में 9 अक्टूबर 2026 को डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर होने का भी उल्लेख है। ईंधन की मौजूदा कीमत जानने के लिए आधिकारिक मूल्य सूची देखना उचित होगा।
बायोडीजल मिश्रण का लक्ष्य क्या है?
बायोडीजल के इस्तेमाल का उद्देश्य वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देना, पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को घटाना है। हालांकि, डीजल में 5 प्रतिशत बायोडीजल मिश्रण का लक्ष्य तय होना और देशभर में इस मात्रा में मिश्रण लागू होना दो अलग-अलग बातें हैं।
दी गई जानकारी के मुताबिक, संसद में पेश आंकड़ों में डीजल में बायोडीजल का वास्तविक मिश्रण 0.1 प्रतिशत से भी कम बताया गया था। इसलिए देशभर में नियमित रूप से 5 प्रतिशत बायोडीजल मिलाए जाने का दावा आधिकारिक पुष्टि के बिना नहीं किया जा सकता।
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण
पश्चिम एशिया में तनाव, आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका और शिपिंग लागत में बढ़ोतरी को कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की संभावित वजह बताया जा रहा है। हालांकि, फरवरी में करीब 69 डॉलर प्रति बैरल से अक्टूबर में 122 डॉलर प्रति बैरल तक कीमत पहुंचने के दावे की पुष्टि संबंधित तारीखों और अंतरराष्ट्रीय बाजार के बेंचमार्क से करना जरूरी है।
वाहन चालकों पर क्या होगा असर?
डीजल में निर्धारित मानकों के अनुसार बायोडीजल मिलाने से वैकल्पिक ईंधन का इस्तेमाल बढ़ सकता है। लेकिन वाहन के इंजन, माइलेज और प्रदर्शन पर इसका असर मिश्रण की गुणवत्ता, मात्रा और वाहन निर्माता की सिफारिशों पर निर्भर करता है। इसलिए वाहन चालकों को अपने वाहन के लिए निर्धारित मानकों के अनुरूप ईंधन का ही इस्तेमाल करना चाहिए।
फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि डीजल में 5 प्रतिशत बायोडीजल मिश्रण को लेकर किए जा रहे दावों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। लक्ष्य और वास्तविक क्रियान्वयन को एक जैसा नहीं माना जाना चाहिए।