रेलवे की लापरवाही पड़ी भारी! ट्रेन में बैग चोरी पर यात्री को मिलेगा ₹1.45 लाख मुआवजा

नई दिल्ली। ट्रेन के आरक्षित कोच में यात्रियों के सामान की सुरक्षा को लेकर दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने उत्तर रेलवे को एक यात्री को ब्याज सहित मुआवजा देने का आदेश बरकरार रखा है। मामले में यात्री का ट्रॉली बैग चोरी होने के बाद जिला उपभोक्ता आयोग ने रेलवे को 1.20 लाख रुपये के नुकसान पर ब्याज और मानसिक प्रताड़ना के लिए 25 हजार रुपये देने का निर्देश दिया था। रेलवे की अपील खारिज होने के बाद अब उसे कुल मिलाकर करीब 1.45 लाख रुपये का भुगतान करना होगा।

आरक्षित कोच में अनधिकृत लोगों के प्रवेश पर उठे सवाल

राज्य उपभोक्ता आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति संगीता ढिंगरा सहगल और सदस्य बिमला कुमारी की पीठ ने जिला आयोग के फैसले को बरकरार रखा। पीठ ने रेलवे की उस दलील को स्वीकार नहीं किया, जिसमें सामान की सुरक्षा को यात्री की निजी जिम्मेदारी बताया गया था।

आयोग के अनुसार, मामले में मुख्य सवाल यह था कि रेलवे कर्मचारी आरक्षित कोच में अनधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश को रोकने में सफल क्यों नहीं रहे। आयोग ने माना कि इस मामले में रेलवे की ओर से सुरक्षा व्यवस्था में बरती गई लापरवाही महत्वपूर्ण थी।

महानंदा एक्सप्रेस में सफर के दौरान चोरी हुआ था बैग

यह मामला 7 जून 2014 का है। अजय कुमार पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से पटना जाने के लिए महानंदा एक्सप्रेस के आरक्षित कोच में सवार थे। आरोप के मुताबिक, ट्रेन के स्टेशन पर खड़े रहने के दौरान दो अज्ञात व्यक्ति कोच में दाखिल हुए और उनका ट्रॉली बैग लेकर फरार हो गए।

यात्री के अनुसार, बैग में साड़ियां, गहने और कपड़े रखे थे, जिनकी कुल कीमत 1.20 लाख रुपये से अधिक थी। घटना के बाद उन्होंने रेलवे के कर्मचारियों और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की।

करीब 10 महीने बाद दर्ज हुई FIR

यात्री को चोरी की शिकायत दर्ज कराने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। उपलब्ध विवरण के अनुसार, आरपीएफ ने सितंबर 2014 में चोरी की पुष्टि की थी। इसके बावजूद प्राथमिकी 23 अप्रैल 2015 को दर्ज हुई। बाद में मई 2017 में पुलिस ने मामले को अनसुलझा घोषित कर दिया।

इसके बाद अजय कुमार ने उपभोक्ता आयोग का रुख किया और चोरी हुए सामान के नुकसान की भरपाई की मांग की।

रेलवे को 9 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा

जिला उपभोक्ता आयोग ने उत्तर रेलवे को 1.20 लाख रुपये के नुकसान की भरपाई करने का आदेश दिया था। इस राशि पर 7 सितंबर 2017 से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने के साथ मानसिक प्रताड़ना के लिए 25 हजार रुपये अतिरिक्त मुआवजा देने को कहा गया था।

उत्तर रेलवे ने इस फैसले को राज्य आयोग में चुनौती दी, लेकिन आयोग ने अपील खारिज कर दी और जिला आयोग के आदेश को बरकरार रखा।

यह फैसला आरक्षित कोचों में यात्रियों की सुरक्षा और अनधिकृत प्रवेश रोकने की जिम्मेदारी को लेकर महत्वपूर्ण है। हालांकि, ऐसे मामलों में रेलवे की जवाबदेही का निर्धारण घटना के तथ्यों और संबंधित आदेश के आधार पर किया जाता है।

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