शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने स्कूलों में साईंश्योर न्यूट्रिशन पायलट प्रोजेक्ट का किया शुभारंभ

रायपुर। स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण को बेहतर बनाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ में ‘साईंश्योर न्यूट्रिशन कार्यक्रम’ की शुरुआत की गई है। शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने गुरुवार को श्री सत्य साईं अन्नपूर्णा ट्रस्ट के सहयोग से इस कार्यक्रम के पायलट प्रोजेक्ट का शुभारंभ किया। पहले चरण में रायपुर जिले के तीन सरकारी स्कूलों के करीब 500 बच्चों को निःशुल्क पोषण सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।

तीन सरकारी स्कूलों से होगी शुरुआत

पायलट प्रोजेक्ट के तहत नवीन प्राथमिक शाला नवागांव, प्राथमिक एवं मिडिल स्कूल परसदा और शासकीय विद्यालय छेरीखेड़ी के विद्यार्थियों को साईंश्योर न्यूट्रिशन दिया जाएगा।

कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को नियमित पौष्टिक आहार उपलब्ध कराकर उनके स्वास्थ्य, एकाग्रता और सीखने की क्षमता को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही बच्चों के समग्र विकास में पोषण की भूमिका को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

कार्यक्रम में बच्चों को वितरित किया गया पोषण सहयोग

कार्यक्रम के शुभारंभ के दौरान श्री सत्य साईं अन्नपूर्णा ट्रस्ट के ट्रस्टी आनंद कडली, शिक्षा विभाग के अधिकारी, स्कूलों के शिक्षक, श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल की टीम और अन्य अतिथि मौजूद रहे। अतिथियों ने बच्चों को साईंश्योर न्यूट्रिशन वितरित कर पायलट प्रोजेक्ट की औपचारिक शुरुआत की।

25 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों में पहुंच रही सेवा

ट्रस्ट के अनुसार, वर्तमान में देश के 25 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों में एक करोड़ से अधिक स्कूली बच्चों को प्रातःकालीन पोषण सेवा उपलब्ध कराई जा रही है।

मुख्यमंत्री की मुलाकात के बाद छत्तीसगढ़ में पहल

बताया गया कि जुलाई 2026 में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सत्य साईं ग्राम, मुद्देनहल्ली का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने सद्गुरु श्री मधुसूदन साईं से मुलाकात कर पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में संभावित सहयोग पर चर्चा की थी। इसी पहल के क्रम में छत्तीसगढ़ में साईंश्योर न्यूट्रिशन कार्यक्रम शुरू किया गया है।

अन्य स्कूलों तक विस्तार की तैयारी

शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि पोषण बच्चों की सीखने की क्षमता से सीधे जुड़ा विषय है। रायपुर जिले में करीब 500 बच्चों के साथ शुरू किए गए पायलट प्रोजेक्ट के अनुभवों का आकलन किया जाएगा। इसके बाद कार्यक्रम को प्रदेश के अन्य क्षेत्रों और अधिक सरकारी स्कूलों तक विस्तार देने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही गई है।

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