हर बच्चे का बचपन, हम सबकी जिम्मेदारी: दुर्ग के 76 चिन्हांकित विद्यालयों में सुरक्षित बचपन अभियान के अंतर्गत विधिक जागरूकता शिविर आयोजित

दुर्ग : किसी बच्चे के लिए विद्यालय केवल पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि सपने देखने, आगे बढ़ने और अपने भविष्य को आकार देने का स्थान होता है। लेकिन इन सपनों की राह में यदि असुरक्षा, शोषण, बाल विवाह या इंटरनेट की दुनिया में छिपे खतरे आ जाएं, तो बच्चे को केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि सही जानकारी, सुरक्षा और समय पर सहायता की भी आवश्यकता होती है। इसी सोच के साथ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा सुरक्षित बचपन अभियान के माध्यम से जिले के विद्यालयों में बच्चों तक कानून और उनके अधिकारों की जानकारी पहुंचाने की पहल की गई है।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली तथा छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के निर्देशानुसार, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के अध्यक्ष के. विनोद कुजूर के मार्गदर्शन में जिले के कुल 76 चिन्हांकित विद्यालयों में अभियान के अंतर्गत विधिक जागरूकता शिविरों का आयोजन किया गया। प्राधिकरण के सचिव उमेश कुमार भागवतकर के समन्वय में संचालित इस अभियान में जिला दुर्ग के समस्त न्यायाधीशों, पैनल अधिवक्ताओं, साइबर सेल के अधिकारीगण, विभिन्न विभागों के अधिकारीगण तथा प्राधिकरण के पैरा लीगल वॉलंटियर्स (पीएलवी) ने सक्रिय भूमिका निभाई।

अभियान की थीम “जागरूकता, सुरक्षा और संरक्षण हर बच्चे का अधिकार” है, जबकि इसका मूल संदेश है—“हर बच्चे का बचपन, हम सबकी जिम्मेदारी।” यह संदेश केवल एक नारा नहीं, बल्कि बच्चों, परिवारों, विद्यालयों और समाज के बीच साझा जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का आह्वान है।

कानून की जानकारी, बच्चों की अपनी भाषा में

इस अभियान की विशेषता यह रही कि बाल संरक्षण जैसे गंभीर विषयों को केवल कानूनी प्रावधानों तक सीमित न रखते हुए बच्चों के दैनिक जीवन से जोड़कर समझाने पर बल दिया गया। अभियान के अंतर्गत छह विषय निर्धारित किए गए हैं—“मेरा बचपन, मेरा अधिकार”, “कानून जानो, बचपन बचाओ”, “सुरक्षित क्लिक, सुरक्षित बचपन”, “बोलो, बताओ, बचाओ”, “ना बाल विवाह, ना बाल शोषण” तथा “जागरूक बचपन, सशक्त भारत”।

इन विषयों के माध्यम से बच्चों को उनके अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा, इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग, शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया तथा सहायता प्राप्त करने के उपलब्ध माध्यमों से परिचित कराया गया। विद्यालयों में आयोजित जागरूकता गतिविधियों के जरिए बच्चों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि असुरक्षित परिस्थितियों को पहचानना, अनुचित व्यवहार के विरुद्ध आवाज उठाना और किसी विश्वसनीय व्यक्ति अथवा सक्षम प्राधिकारी से सहायता मांगना उनके अधिकारों का हिस्सा है।

अभियान के दौरान न्यायिक अधिकारियों, पैनल अधिवक्ताओं, साइबर सेल तथा विभिन्न विभागों के अधिकारीगण और पीएलवी ने अपने-अपने स्तर पर बच्चों को सरल एवं सहज तरीके से जानकारी प्रदान की। इस सामूहिक सहभागिता ने बाल अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और बाल संरक्षण के विषयों को व्यापक रूप से बच्चों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

प्रतिकूल मौसम के बावजूद अभियान के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता

सुरक्षित बचपन अभियान के दौरान मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां भी सामने आईं। बंगाल की खाड़ी से उठे गंभीर चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ (Cyclone Arnab) के कारण मौसम अत्यधिक खराब होने से दिनांक 28/10/2026 से 30/10/2026 तक जिला दुर्ग के समस्त विद्यालयों में अवकाश घोषित था। इसके पश्चात दिनांक 01/11/2026 को रविवार होने के कारण शासकीय अवकाश रहा।

इन परिस्थितियों के बावजूद जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग ने अभियान के उद्देश्य और निर्धारित लक्ष्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखी। अधिकाधिक विद्यालयों तक पहुंचने तथा बच्चों को उनके अधिकारों और सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से दिनांक 02/11/2026 एवं 03/11/2026 को भी विद्यालयों में कार्यक्रम आयोजित किए गए। प्राधिकरण के निरंतर प्रयासों और विभिन्न सहभागी संस्थाओं के सहयोग से अभियान की सफलता सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य किया गया।

जागरूकता से आत्मविश्वास तक

सुरक्षित बचपन की दिशा में पहला कदम यह है कि बच्चा यह समझ सके कि उसकी सुरक्षा, गरिमा और सम्मान महत्वपूर्ण हैं। उसे यह पता हो कि किसी भी प्रकार के शोषण या उत्पीड़न की स्थिति में चुप रहना उसकी मजबूरी नहीं है और सहायता मांगने के लिए उचित व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। इसी क्रम में बच्चों को निःशुल्क विधिक सहायता तथा बाल संरक्षण से संबंधित सहायता-व्यवस्थाओं की जानकारी भी दी गई।

76 चिन्हांकित विद्यालयों में आयोजित शिविरों के माध्यम से बाल विवाह, बाल शोषण और ऑनलाइन जोखिमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने में समाज की सामूहिक भूमिका को भी रेखांकित किया गया। अभियान में न्यायिक अधिकारियों, पैनल अधिवक्ताओं, साइबर सेल, विभिन्न विभागों के अधिकारीगण तथा पीएलवी की सक्रिय सहभागिता ने इस प्रयास को व्यापक स्वरूप प्रदान किया।

सुरक्षित बचपन अभियान का संदेश स्पष्ट है—बच्चे केवल देश का भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान की ऐसी जिम्मेदारी हैं, जिनकी सुरक्षा और सम्मान आज सुनिश्चित किया जाना चाहिए। जब बच्चे अपने अधिकारों को पहचानेंगे, अपनी बात कहने का साहस जुटाएंगे और सहायता के रास्तों से परिचित होंगे, तभी जागरूकता वास्तविक सुरक्षा में बदल सकेगी।

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