नई दिल्ली: कोलकाता में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल इवेंट उस समय विवादों में घिर गया, जब हजारों की संख्या में जुटे दर्शक अपने पसंदीदा फुटबॉल आइकन लियोनेल मेसी को करीब से नहीं देख सके। कार्यक्रम खत्म होने के बाद स्टेडियम के बाहर और भीतर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। नाराज दर्शकों ने आयोजकों पर अव्यवस्था और भेदभाव का आरोप लगाते हुए विरोध जताया, जिससे हालात कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गए।
बताया जा रहा है कि भारी भरकम कीमत पर टिकट खरीदने वाले आम दर्शकों को मेसी की झलक तक नहीं मिल पाई, जबकि वीआईपी गैलरी में मौजूद नेताओं और अधिकारियों के बीच मेसी सीमित समय तक ही दिखाई दिए। इसी बात को लेकर दर्शकों का गुस्सा फूट पड़ा और पुलिस को स्थिति संभालने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा।
इस घटना ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने पश्चिम बंगाल सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इतने बड़े आयोजन में भीड़ प्रबंधन पूरी तरह विफल रहा। उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे “वीआईपी संस्कृति का नतीजा” बताया। सरमा ने कहा कि आम जनता की भावनाओं की अनदेखी करना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
दूसरी ओर, राज्य प्रशासन की ओर से सफाई दी गई है कि हालात को जल्द ही नियंत्रण में ले लिया गया था और किसी बड़ी अप्रिय घटना से बचाव कर लिया गया। राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने भी मामले पर संज्ञान लेते हुए जानकारी दी कि आयोजन से जुड़े एक जिम्मेदार व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है और पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है।
फुटबॉल प्रेमियों के लिए यादगार बनने वाला यह आयोजन अव्यवस्था और नाराजगी के कारण चर्चा का विषय बन गया है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि जांच के बाद आयोजकों और जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है।