नई दिल्ली। सरकारी नियुक्तियों से जुड़े एक अहम फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि सेवा नियमों में पब्लिक सर्विस कमीशन (PSC) के किसी उम्मीदवार की योग्यता पर लिए गए निर्णय को अंतिम माना गया है, तो चयन प्रक्रिया पूरी होने और नियुक्ति की सिफारिश के बाद राज्य सरकार उसी उम्मीदवार की योग्यता की नए सिरे से विस्तृत जांच कर अलग निष्कर्ष नहीं निकाल सकती।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने शैलेंद्र कुमार पटेल की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि जब PSC किसी उम्मीदवार की योग्यता की जांच कर उसे योग्य घोषित करता है और नियुक्ति के लिए उसकी सिफारिश करता है, तो सरकार स्वतंत्र रूप से उसी योग्यता का दोबारा मूल्यांकन कर उम्मीदवार को अयोग्य घोषित नहीं कर सकती।
रजिस्ट्रार पद की नियुक्ति से जुड़ा था मामला
यह मामला शैलेंद्र कुमार पटेल की छत्तीसगढ़ राज्य विश्वविद्यालय में रजिस्ट्रार पद पर नियुक्ति से जुड़ा था। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने पटेल का चयन कर राज्य सरकार से उनकी नियुक्ति की सिफारिश की थी।
हालांकि, PSC की सिफारिश के बाद राज्य सरकार ने उनकी योग्यता और अनुभव की जांच के लिए एक समिति गठित कर दी। समिति ने अपनी जांच में निष्कर्ष निकाला कि पटेल के पास रजिस्ट्रार पद के लिए आवश्यक अनुभव नहीं है। इसके आधार पर उन्हें अयोग्य मान लिया गया।
हाई कोर्ट के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
राज्य सरकार के इस फैसले को चुनौती देते हुए मामला अदालत पहुंचा। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की सिंगल बेंच और बाद में डिवीजन बेंच ने भी सरकार के निर्णय को सही ठहराया था।
इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि छत्तीसगढ़ स्टेट यूनिवर्सिटीज सर्विस रूल्स, 1983 के नियम 10 के तहत उम्मीदवार की योग्यता के संबंध में आयोग का निर्णय अंतिम है। ऐसे में सरकार के लिए PSC द्वारा योग्यता तय किए जाने के बाद उसी मुद्दे पर स्वतंत्र रूप से दोबारा विस्तृत जांच कर अलग निष्कर्ष निकालना उचित नहीं था।
सरकार का सत्यापन अधिकार पूरी तरह खत्म नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि नियम 10 नियुक्ति करने वाले अधिकारी को उम्मीदवार की योग्यता के संबंध में सत्यापन करने से पूरी तरह नहीं रोकता। हालांकि, यदि नियुक्ति अधिकारी योग्यता पर कोई अलग निर्णय लेता है, तो वह स्पष्ट और प्रमाणित कमी पर आधारित होना चाहिए।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जहां सेवा नियम PSC को उम्मीदवार की योग्यता तय करने का अंतिम अधिकार देते हैं, वहां चयन प्रक्रिया पूरी होने और आयोग की ओर से नियुक्ति की सिफारिश किए जाने के बाद सरकार उम्मीदवार की पात्रता पर नए सिरे से विस्तृत फैसला नहीं कर सकती।
यह फैसला सरकारी नियुक्तियों में PSC की भूमिका, चयन प्रक्रिया की अंतिमता और नियुक्ति प्राधिकारियों की सीमाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।