बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार और प्रशासन को मौजूदा कानूनों एवं प्रशासनिक निर्देशों को प्रभावी तरीके से लागू करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित ‘छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण विधेयक, 2026’ की प्रक्रिया लंबित होने के कारण वर्तमान नियमों के पालन में किसी तरह की ढिलाई नहीं की जा सकती।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने ध्वनि प्रदूषण से जुड़े स्वतः संज्ञान (Suo Motu) जनहित मामले की सुनवाई के दौरान ये निर्देश दिए।
नए कानून की प्रक्रिया जारी
सुनवाई के दौरान गृह विभाग के प्रमुख सचिव की ओर से पेश व्यक्तिगत शपथपत्र का कोर्ट ने अवलोकन किया। इसमें बताया गया कि ध्वनि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सरकार नए कानूनी प्रावधान तैयार कर रही है।
सरकार के अनुसार, ‘छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985’ में संशोधन के लिए विशेष प्रारूप समिति का गठन किया गया था। समिति ने प्रस्तावित ‘छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण विधेयक, 2026’ का हिंदी और अंग्रेजी में ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। संबंधित दस्तावेज और कार्रवाई रिपोर्ट भी तैयार की जा चुकी है।
विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद विधेयक को मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा जाएगा और इसके बाद विधानसभा में पेश किया जाएगा।
नया कानून आने तक मौजूदा नियम लागू
हाईकोर्ट ने माना कि नए विधेयक को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, लेकिन जब तक नया कानून अस्तित्व में नहीं आता, तब तक वर्तमान कानून और प्रशासनिक दिशा-निर्देश पूरी तरह लागू रहेंगे।
कोर्ट ने सरकार को विधायी प्रक्रिया पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय दिया है और मामले की अगली सुनवाई आठ सप्ताह बाद निर्धारित की है।
लाउडस्पीकर, DJ और पटाखों पर निगरानी
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, जिला प्रशासन, पुलिस, नगर निगम और अन्य स्थानीय निकायों को ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए लगातार प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन को खास तौर पर लाउडस्पीकर, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, DJ, ध्वनि विस्तारक यंत्र और तेज आवाज वाले पटाखों से होने वाले शोर पर निगरानी रखने को कहा गया है। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।
रात और साइलेंट जोन में विशेष सतर्कता
कोर्ट ने रात के समय ध्वनि प्रदूषण पर विशेष निगरानी रखने के साथ-साथ अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों और अदालतों के आसपास के साइलेंट जोन में नियमों का सख्ती से पालन कराने को कहा है।
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद प्रदेश में पुलिस और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ गई है। अब अधिकारियों को मौजूदा नियमों के तहत ध्वनि प्रदूषण पर लगातार निगरानी और कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।