नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत सोमवार को हंगामेदार रही। पहले ही दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जिसके चलते राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही। लगातार विरोध और नारेबाजी के कारण राज्यसभा की कार्यवाही कुल 6 बार स्थगित करनी पड़ी और अंततः पूरे दिन के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने नीट परीक्षा और कथित पेपर लीक का मुद्दा उठाते हुए इसे लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय बताया। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं पर चर्चा की मांग की। इस दौरान विपक्षी सांसदों ने जोरदार नारेबाजी की, जिससे सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी।
सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने हंगामे के चलते पहले कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित की। इसके बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हुई और कार्यवाही क्रमशः 12:30 बजे, 12:50 बजे, 2 बजे और 2:30 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। अंततः लगातार जारी गतिरोध को देखते हुए सदन की कार्यवाही मंगलवार सुबह तक के लिए स्थगित कर दी गई।
सत्र की शुरुआत में सभापति ने नव-निर्वाचित सदस्यों का स्वागत करते हुए सभी सांसदों से सदन की गरिमा बनाए रखने और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक चर्चा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मॉनसून सत्र में कुल 19 बैठकें प्रस्तावित हैं और उपलब्ध समय का सदुपयोग करना सभी सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर सभापति ने राज्यसभा में एआई आधारित तात्कालिक अनुवाद सुविधा की भी शुरुआत की घोषणा की। फिलहाल यह सुविधा 9 भाषाओं में उपलब्ध होगी और भविष्य में इसे संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं तक विस्तारित किया जाएगा।
सभापति ने कहा कि संसद जनता की आकांक्षाओं का सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच है और प्रत्येक व्यवधान देश एवं जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा को प्रभावित करता है। उन्होंने सभी दलों से सहयोग की अपील करते हुए सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से संचालित करने का आग्रह किया।