दुर्ग | दुर्ग जिले के पीपरछेड़ी गांव में एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) के लिए प्रस्तावित आवास निर्माण को लेकर विवाद अब सड़क पर उतर आया है। सोमवार को सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और धरना देते हुए शासन के जमीन अधिग्रहण के फैसले के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि गांव की सामुदायिक जमीन किसी भी हाल में एसटीएफ को नहीं दी जाएगी।
मुक्तिधाम और खेल मैदान पर संकट
ग्रामीणों का आरोप है कि एसटीएफ लगभग 10 एकड़ ऐसी जमीन पर कब्जा करना चाहती है, जहां गांव का मुक्तिधाम, प्राचीन मंदिर और बच्चों का खेल मैदान स्थित है। ग्रामीणों ने बताया कि इस जमीन पर भविष्य में हाट-बाजार बनाने का प्रस्ताव है, जिससे स्थानीय लोगों को स्वरोजगार मिलेगा। इसे ‘तानाशाही फैसला’ बताते हुए ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रक्रिया नहीं रुकी, तो वे चक्काजाम और उग्र आंदोलन करेंगे।

ग्राम सभा ने सर्वसम्मति से पारित किया विरोध प्रस्ताव
पीपरछेड़ी की सरपंच ललिता निषाद ने बताया कि 28 जनवरी को आयोजित ग्राम सभा में 65 सदस्यों की मौजूदगी में सर्वसम्मति से प्रस्ताव (नंबर 18) पारित किया गया था। इस प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया था कि गांव की जमीन एसटीएफ को नहीं दी जाएगी। सरपंच ने आरोप लगाया कि कलेक्टर को लिखित सूचना देने के बावजूद एसटीएफ की टीम गांव पहुंची और जांच के बहाने मिट्टी की खुदाई शुरू कर दी, जिसे ग्रामीणों ने एकजुट होकर रुकवा दिया।
विकास कार्यों के लिए आरक्षित है भूमि
सरपंच का कहना है कि यह जमीन गांव के भविष्य, बच्चों की शिक्षा और महिला सदन जैसे महत्वपूर्ण सामुदायिक कार्यों के लिए आरक्षित है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि एसटीएफ आवास के लिए किसी अन्य विकल्प पर विचार किया जाए और गांव की पैतृक व सामुदायिक संपदा को सुरक्षित रखा जाए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार हरिओम द्विवेदी ने बताया कि बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने कहा, “ग्रामीणों की आपत्तियों को कलेक्टर महोदय तक पहुंचा दिया गया है। वरिष्ठ अधिकारियों को पूरे मामले से अवगत कराया जाएगा और सभी पक्षों की सुनवाई के बाद ही अग्रिम निर्णय लिया जाएगा।”