हंगरी: यूरोप की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। हंगरी के नए प्रधानमंत्री पीटर मैग्यार ने अंतरराष्ट्रीय कानून को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि उनके देश में किसी भी वांछित अंतरराष्ट्रीय नेता को प्रवेश करने पर हिरासत में लिया जाएगा। इस बयान ने खास तौर पर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
मैग्यार ने स्पष्ट किया कि International Criminal Court (आईसीसी) के आदेशों का पालन उनकी सरकार की प्राथमिकता होगी। उनका कहना है कि यदि आईसीसी द्वारा वांछित कोई भी व्यक्ति हंगरी की सीमा में प्रवेश करता है, तो उसे कानून के तहत हिरासत में लेना अनिवार्य होगा। यह रुख पूर्व प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन की नीतियों से बिल्कुल अलग है, जिन्होंने पहले आईसीसी के आदेशों को मानने से इनकार किया था।
दिलचस्प बात यह है कि मैग्यार ने हाल ही में नेतन्याहू को हंगरी आने का निमंत्रण भी दिया था। उन्हें 23 अक्टूबर को 1956 की हंगरी क्रांति की वर्षगांठ कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बुलाया गया था। लेकिन नए रुख के बाद अब इस संभावित यात्रा पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।
दरअसल, आईसीसी ने नवंबर 2024 में नेतन्याहू और इजरायल के पूर्व रक्षा मंत्री योव गैलैंट के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। यह कार्रवाई गाजा संघर्ष के दौरान कथित युद्ध अपराधों और मानवाधिकार उल्लंघनों से जुड़े आरोपों के आधार पर की गई थी, जो 7 अक्टूबर 2023 हमास हमला के बाद शुरू हुई सैन्य कार्रवाई से संबंधित है।
हालांकि, इजरायल इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करता है और दावा करता है कि उसकी सेना ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन किया है। वहीं, इस मुद्दे पर दुनिया के अलग-अलग देशों का रुख भी एक जैसा नहीं है। कुछ देश आईसीसी के फैसले का समर्थन कर रहे हैं, जबकि अन्य देश अपने राजनीतिक और कानूनी कारणों से इससे दूरी बनाए हुए हैं।
कुल मिलाकर, हंगरी के नए नेतृत्व का यह रुख न केवल नेतन्याहू की संभावित यात्रा को प्रभावित कर सकता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीतिक संबंधों में भी नई हलचल पैदा कर सकता है।