मुंबई। ओटीटी प्लेटफॉर्म जियोहॉटस्टार पर 25 सितंबर को रिलीज हुई वेब सीरीज ‘हुंकार: द रोर’ (Hunkkaar: The Roar) इन दिनों चर्चा में है। नित्या मेहरा के निर्देशन में बनी यह छह एपिसोड की सीरीज एक नाबालिग लड़की के गंभीर आरोप, प्रभावशाली धार्मिक गुरु और उसके खिलाफ शुरू होने वाली लंबी कानूनी लड़ाई की कहानी पेश करती है। सीरीज में अनीत पद्दा, फातिमा सना शेख, रघुबीर यादव, मोहम्मद जीशान अय्यूब, राम कपूर, अर्जुन माथुर और राजेश शर्मा जैसे कलाकार नजर आते हैं।
क्या है ‘हुंकार: द रोर’ की कहानी?
सीरीज की कहानी मध्य प्रदेश के काल्पनिक छोटे शहर खरगंज की पृष्ठभूमि में बुनी गई है। यहां बाबुजी का किरदार निभा रहे रघुबीर यादव एक प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु हैं, जिन्हें बड़ी संख्या में लोग बेहद श्रद्धा के साथ मानते हैं।
कहानी में उस समय बड़ा मोड़ आता है, जब नाबालिग छात्रा मीनू रावत, जिसका किरदार अनीत पद्दा ने निभाया है, बाबुजी पर यौन उत्पीड़न और बलात्कार जैसे गंभीर आरोप लगाती है। आरोप सामने आते ही प्रशासन, पुलिस और मीडिया के बीच हलचल तेज हो जाती है।
मामले की जांच की जिम्मेदारी एसीपी जसलीन सोनी को सौंपी जाती है, जिसका किरदार फातिमा सना शेख ने निभाया है। जांच आगे बढ़ने के साथ पीड़ित परिवार पर दबाव और डराने-धमकाने की कोशिशें शुरू होती हैं। इसके बाद कहानी पुलिस जांच से आगे बढ़कर अदालत और कानूनी दांव-पेच तक पहुंचती है।
कलाकारों की एक्टिंग कैसी है?
फातिमा सना शेख एसीपी जसलीन सोनी के किरदार में प्रभाव छोड़ती हैं। उन्होंने एक पुलिस अधिकारी के तौर पर किरदार की गंभीरता और दृढ़ता को अच्छी तरह निभाया है।
अनीत पद्दा के लिए यह भूमिका खास है। मीनू के किरदार में वह शुरुआत के डर और असहजता से लेकर आगे आने वाले आत्मविश्वास और बेबाकी तक के बदलाव को सधे हुए अंदाज में पेश करती हैं।
वहीं रघुबीर यादव आध्यात्मिक गुरु के किरदार में नजर आते हैं, हालांकि कुछ जगहों पर उनका प्रदर्शन अपेक्षाकृत हल्का महसूस होता है। मोहम्मद जीशान अय्यूब और राम कपूर वकीलों की भूमिकाओं में सहज नजर आते हैं।
कहां कमजोर पड़ती है सीरीज?
‘हुंकार: द रोर’ का विषय गंभीर और संवेदनशील है, लेकिन इसकी कहानी का आधार पूरी तरह नया नहीं है। यौन अपराध, प्रभावशाली व्यक्ति के खिलाफ संघर्ष और न्याय की कानूनी लड़ाई पर पहले भी कई फिल्में और वेब सीरीज बन चुकी हैं। ऐसे में इस कहानी से एक अलग दृष्टिकोण की उम्मीद रहती है।
करीब 50-50 मिनट के छह एपिसोड कहानी को आगे बढ़ाते हैं, लेकिन कुछ हिस्सों में रफ्तार धीमी महसूस होती है। कई जगह ऐसा लगता है कि कहानी को जरूरत से ज्यादा लंबा किया गया है। यही वजह है कि मजबूत विषय होने के बावजूद सीरीज का प्रभाव हर जगह एक जैसा नहीं रहता।
कुल मिलाकर कैसी है ‘हुंकार’?
‘हुंकार: द रोर’ एक संवेदनशील मुद्दे को पुलिस जांच, सामाजिक दबाव और कानूनी लड़ाई के जरिए सामने लाने की कोशिश करती है। अनीत पद्दा और फातिमा सना शेख का अभिनय कहानी को मजबूती देता है, जबकि कुछ हिस्सों की धीमी गति और विषय की परिचित पृष्ठभूमि इसकी पकड़ को थोड़ा कमजोर करती है।
अगर आपको क्राइम, कोर्टरूम ड्रामा और सामाजिक मुद्दों पर आधारित वेब सीरीज पसंद हैं, तो ‘हुंकार: द रोर’ आपके लिए एक विकल्प हो सकती है।