IAS अमित कटारिया की बढ़ी मुश्किलें! हाईकोर्ट ने 3 अधिकारियों को जारी किया नोटिस, मांगा जवाब

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल में पूर्णकालिक रजिस्ट्रार की नियुक्ति में देरी को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत के पूर्व आदेश का निर्धारित समय-सीमा में पालन नहीं होने पर स्वास्थ्य सचिव आईएएस अमित कटारिया समेत तीन अधिकारियों को अवमानना का कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को तीन सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

तीन अधिकारियों से मांगा स्पष्टीकरण

जानकारी के अनुसार, 26 अक्टूबर 2026 को अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव आईएएस अमित कटारिया, स्वास्थ्य संचालक संजीव झा और छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष अरुण मिश्रा को नोटिस जारी किया। अदालत ने पूछा है कि पूर्णकालिक रजिस्ट्रार की नियुक्ति के संबंध में पूर्व में दिए गए आदेश का निर्धारित समय में पालन क्यों नहीं किया गया। साथ ही, अधिकारियों से यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए।

आठ सप्ताह में नियुक्ति का दिया गया था निर्देश

यह पूरा मामला फार्मेसी काउंसिल में पूर्णकालिक रजिस्ट्रार की नियुक्ति से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, हाईकोर्ट ने 15 मई 2026 को राज्य शासन और फार्मेसी काउंसिल को आठ सप्ताह के भीतर निर्धारित योग्यता रखने वाले पूर्णकालिक रजिस्ट्रार की नियुक्ति करने का निर्देश दिया था। निर्धारित समय-सीमा में नियुक्ति पूरी नहीं होने के बाद मामला फिर अदालत पहुंच गया।

पूर्व रजिस्ट्रार की योग्यता को लेकर शुरू हुआ विवाद

मामले की शुरुआत काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार अश्वनी गुरडेकर की नियुक्ति और उनकी योग्यता को लेकर हुए विवाद से हुई थी। जानकारी के अनुसार, हाईकोर्ट ने 3 मार्च 2026 को तत्कालीन रजिस्ट्रार को पद से हटाने का निर्देश दिया था। इसके बाद नई नियुक्ति के लिए राज्य शासन और काउंसिल को आठ सप्ताह का समय दिया गया। समय-सीमा में नियुक्ति नहीं होने पर याचिकाकर्ता डॉ. राकेश गुप्ता ने अवमानना याचिका दाखिल की।

तीन सप्ताह में देना होगा जवाब

हाईकोर्ट ने तीनों अधिकारियों को अपना पक्ष रखने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। उन्हें अदालत को बताना होगा कि नियुक्ति के लिए क्या कदम उठाए गए और आदेश का पालन निर्धारित समय में क्यों नहीं हो सका। अब संबंधित अधिकारियों के जवाब और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर अदालत आगे की कार्रवाई तय करेगी।

गौरतलब है कि अवमानना का कारण बताओ नोटिस जारी होने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित अधिकारियों को दोषी ठहरा दिया गया है। फिलहाल अदालत ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा है और अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है। अब इस मामले में राज्य शासन और फार्मेसी काउंसिल के जवाब पर नजर रहेगी।

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