नई दिल्ली। केंद्र सरकार की एथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल नीति को लेकर विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि एथेनॉल उत्पादन बढ़ाने की मौजूदा नीति का असर देश की खाद्य सुरक्षा, कृषि व्यवस्था, भूजल और पर्यावरण पर पड़ सकता है। इसके साथ ही E20 पेट्रोल की कीमत कम करने की मांग भी उठी है, क्योंकि विशेषज्ञों के मुताबिक इससे वाहनों के माइलेज में कमी आती है और कुछ मामलों में इंजन के कलपुर्जों पर अतिरिक्त असर पड़ सकता है।
सोमवार को इंडियन वीमेंस प्रेस कॉर्प्स की ओर से आयोजित एक परिचर्चा में एथेनॉल नीति से जुड़े इन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम में दिल्ली साइंस फोरम के वैज्ञानिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता डी. रघुनंदन, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय के पूर्व सचिव सिराज हुसैन और नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद शामिल हुए।
‘भोजन से ईंधन वाली खेती की ओर बढ़ रहा देश’
डी. रघुनंदन ने कहा कि एथेनॉल नीति के कारण भारतीय कृषि का फोकस धीरे-धीरे खाद्य उत्पादन से ईंधन उत्पादन की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने एथेनॉल निर्माण में मक्के के बढ़ते इस्तेमाल का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत पहले मक्के का निर्यात करता था, लेकिन अब घरेलू मांग पूरी करने के लिए आयात की स्थिति बन रही है।
उन्होंने इसे कृषि क्षेत्र के लिए विघटनकारी नीति बताते हुए कहा कि इससे पानी के अत्यधिक इस्तेमाल और खेती के पारंपरिक पैटर्न पर असर पड़ सकता है।
चावल और चीनी के सरप्लस से निपटने की कोशिश
नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद ने कहा कि सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में चावल और चीनी के अतिरिक्त उत्पादन को खपाने के लिए एथेनॉल कार्यक्रम को बढ़ावा दिया है। उनके मुताबिक, सरकार ने चावल और चीनी की खरीद MSP पर की, जिसकी कीमत कई बार खुले और अंतरराष्ट्रीय बाजार से अधिक रही। ऐसे में अतिरिक्त स्टॉक को खपाने के लिए एथेनॉल उत्पादन एक विकल्प बना।
रमेश चंद ने धान की खेती वाले कुछ क्षेत्रों में मक्के की खेती बढ़ाने की जरूरत बताई। उनका कहना है कि धान की खेती में अधिक पानी की आवश्यकता होती है और इससे मीथेन जैसी ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन भी होता है।
ब्राजील से भारत की तुलना पर उठाए सवाल
पूर्व कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण सचिव सिराज हुसैन ने भारत के एथेनॉल कार्यक्रम की तुलना ब्राजील से करने को उचित नहीं माना। उन्होंने कहा कि ब्राजील में चीनी का उत्पादन काफी अधिक है और वहां आबादी की तुलना में खेती योग्य जमीन भी पर्याप्त है।
हुसैन ने जलवायु परिवर्तन को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई अध्ययनों में भविष्य में जलवायु परिवर्तन के कारण भारत के कृषि उत्पादन में 25 प्रतिशत तक की गिरावट की आशंका जताई गई है। ऐसे में भारत की परिस्थितियों को ब्राजील से अलग नजरिए से देखना जरूरी है।
E20 बंद कर E10 पर लौटने की मांग
डी. रघुनंदन ने सरकार से 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल को बंद कर E10 पेट्रोल पर वापस लौटने की मांग की। उनका कहना है कि मौजूदा एथेनॉल नीति का पर्यावरण और उपभोक्ताओं पर बोझ पड़ रहा है, जबकि किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि E20 नीति को वापस लेने पर मुख्य नुकसान उन डिस्टिलरीज को होगा, जिन्होंने एथेनॉल उत्पादन के लिए निवेश किया है। उनके मुताबिक, सरकार इन इकाइयों को मुआवजा देकर इस नुकसान की भरपाई कर सकती है।
हालांकि, परिचर्चा में विशेषज्ञों के बीच एथेनॉल नीति को लेकर अलग-अलग राय सामने आई। एक ओर जहां एथेनॉल को अतिरिक्त कृषि उत्पादन के उपयोग और ईंधन मिश्रण के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर विशेषज्ञों ने खाद्य सुरक्षा, पानी की उपलब्धता, कृषि भूमि के उपयोग और उपभोक्ताओं की लागत को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत बताई।