F-35 के विकल्प के तौर पर Su-57 पर भारत की नजर, 8-10 फाइटर जेट का ऑफर; AMCA के बीच बढ़ी हलचल

नई दिल्ली: चीन और पाकिस्तान से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत की पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की जरूरत को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच रूस ने भारत को अपने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान Su-57E की सीमित संख्या जल्द उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक, रूस की पेशकश में करीब 8 से 10 Su-57E फाइटर जेट के साथ लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली R-77M BVR मिसाइल भी शामिल है। हालांकि, इस प्रस्ताव पर भारत की ओर से अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।

AMCA से पहले मिल सकती है 5वीं पीढ़ी की क्षमता

रूस के इस प्रस्ताव को भारत के स्वदेशी AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) कार्यक्रम के बीच एक संभावित अंतरिम विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। यदि भारत सीमित संख्या में Su-57E खरीदता है, तो भारतीय वायुसेना को AMCA के ऑपरेशनल होने से पहले ही पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के संचालन का अनुभव मिल सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, 8 से 10 विमानों की संख्या भारतीय वायुसेना की करीब आधी स्क्वाड्रन के बराबर होगी। इससे वायुसेना को विमान की क्षमताओं, रखरखाव और ऑपरेशनल जरूरतों का शुरुआती अनुभव हासिल करने का मौका मिल सकता है।

चीन-पाकिस्तान की चुनौती के बीच बढ़ी जरूरत

भारत की सुरक्षा रणनीति में पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि चीन ने अपनी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को विकसित और तैनात किया है। वहीं, पाकिस्तान को भी भविष्य में चीन से ऐसे विमान मिलने की अटकलें लगती रही हैं।

ऐसे में भारत के सामने दो परमाणु-सशस्त्र पड़ोसियों से उत्पन्न संभावित सुरक्षा चुनौती के बीच आधुनिक लड़ाकू क्षमता मजबूत करने की जरूरत है। भारत ने फ्रांस से अतिरिक्त राफेल विमानों की खरीद को भी मंजूरी दी है, लेकिन राफेल को पांचवीं पीढ़ी का विमान नहीं माना जाता।

Su-57 में क्या है खास?

Su-57E को रूस के सबसे उन्नत ऑपरेशनल लड़ाकू विमानों में गिना जाता है। इसे कम रडार विजिबिलिटी, आंतरिक हथियार क्षमता, उन्नत सेंसर और नेटवर्क-केंद्रित युद्ध क्षमता जैसी पांचवीं पीढ़ी की विशेषताओं के साथ विकसित किया गया है।

सीमित संख्या में Su-57E मिलने से भारतीय वायुसेना को पांचवीं पीढ़ी के प्लेटफॉर्म के संचालन, प्रशिक्षण और रखरखाव का व्यावहारिक अनुभव हासिल हो सकता है।

R-77M मिसाइल पर भी नजर

रूसी प्रस्ताव का एक अहम हिस्सा R-77M हवा से हवा में मार करने वाली लंबी दूरी की BVR मिसाइल है। इसे Izdeliye 180 के नाम से भी जाना जाता है। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसकी मारक क्षमता करीब 200 किलोमीटर तक बताई जाती है।

मिसाइल में एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे (AESA) सीकर और डुअल-पल्स रॉकेट मोटर जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। Su-57 की सेंसर क्षमताओं और कम रडार विजिबिलिटी के साथ इसका संयोजन लंबी दूरी की हवाई लड़ाई में उपयोगी हो सकता है।

अलग बेड़े से बढ़ेंगी चुनौतियां

हालांकि, Su-57E की सीमित खरीद के सामने कई चुनौतियां भी हैं। नए लड़ाकू विमान के लिए अलग पायलट ट्रेनिंग, रखरखाव व्यवस्था, स्पेयर पार्ट्स, हथियार भंडार और लॉजिस्टिक सपोर्ट की जरूरत होगी।

इसके अलावा, इसका असर भारत के स्वदेशी AMCA कार्यक्रम पर भी पड़ सकता है। अगर Su-57E को केवल अंतरिम समाधान के तौर पर शामिल किया जाता है तो इसकी सीमित संख्या तक खरीद रखी जा सकती है। लेकिन AMCA कार्यक्रम में देरी होने पर Su-57E की संख्या बढ़ाने का दबाव बन सकता है।

फिलहाल भारत का फोकस अपनी स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी की क्षमता विकसित करने पर है। ऐसे में Su-57E का प्रस्ताव तत्काल परिचालन जरूरतों और दीर्घकालिक AMCA रणनीति के बीच संतुलन का सवाल खड़ा करता है।

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