ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदली भारत की रणनीति, 50 हजार जवानों की ड्रोन फोर्स होगी तैनात

नई दिल्ली : नई दिल्ली में ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर भारत ने अपनी बदलती सैन्य रणनीति और तकनीकी ताकत की नई तस्वीर पेश की। पिछले साल मई में चले इस विशेष सैन्य अभियान के बाद भारतीय सेना ने आधुनिक युद्ध प्रणाली को तेजी से अपनाने की दिशा में बड़े कदम उठाए हैं। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार भविष्य के युद्धों में ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर की भूमिका सबसे अहम रहने वाली है।

इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय रक्षा तंत्र एक विशाल ड्रोन नेटवर्क तैयार कर रहा है। सेना, वायुसेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के लिए लगभग 50 हजार जवानों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन जवानों को आधुनिक ड्रोन ऑपरेशन, निगरानी और रीयल-टाइम युद्ध तकनीकों में दक्ष बनाया जाएगा। आने वाले वर्षों में देशभर में कई एडवांस ट्रेनिंग सेंटर भी स्थापित किए जाएंगे, जहां वर्चुअल रियलिटी और सिम्युलेशन तकनीक के जरिए युद्ध अभ्यास कराया जाएगा।

रक्षा अधिकारियों का मानना है कि भविष्य में किसी भी सैन्य संकट के दौरान ड्रोन यूनिट सबसे पहले कार्रवाई करेगी। योजना के तहत सेना की हर बड़ी यूनिट को हजारों ड्रोन से लैस किया जाएगा और सैनिकों को व्यक्तिगत स्तर पर भी छोटे ड्रोन उपलब्ध कराए जाएंगे। इस पूरी प्रणाली को एयर डिफेंस नेटवर्क और उन्नत कमांड सिस्टम से जोड़ा जाएगा, ताकि सीमाओं पर तेज प्रतिक्रिया दी जा सके।

बीते एक वर्ष में भारत ने रक्षा निर्माण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। स्वदेशी मिसाइल, ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के निर्माण में तेजी आई है। कई निजी भारतीय कंपनियां अब मिसाइल इंजन, रडार और हाईटेक उपकरण तैयार कर रही हैं, जिससे विदेशी निर्भरता कम हुई है। रक्षा क्षेत्र में स्टार्टअप और एमएसएमई की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है।

रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले समय में युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि साइबर, अंतरिक्ष और इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्क पर भी लड़े जाएंगे। इसी वजह से भारत एंटी-ड्रोन तकनीक, साइबर सुरक्षा और इलेक्ट्रॉनिक संचार प्रणाली को मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दे रहा है।

गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने सीमापार आतंकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए बड़ी कार्रवाई की थी। इसके बाद दुश्मन की ओर से ड्रोन हमले की कोशिशें हुईं, जिन्हें भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने बड़े पैमाने पर विफल कर दिया था। इस अभियान को भारत की आधुनिक सैन्य रणनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।

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