तेहरान। ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की बहुप्रतीक्षित अंतिम यात्रा तीन महीने बाद शुरू होने जा रही है। ईरानी प्रशासन ने सार्वजनिक श्रद्धांजलि और अंतिम संस्कार का विस्तृत कार्यक्रम जारी किया है। सुरक्षा कारणों और क्षेत्रीय तनाव के चलते अंतिम संस्कार को पहले स्थगित किया गया था। अब तेहरान से मशहद तक होने वाले इस बहु-चरणीय आयोजन के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं और लाखों लोगों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
सुरक्षा कारणों से टला था अंतिम संस्कार
अधिकारियों के अनुसार, खामेनेई की मृत्यु के बाद ईरान क्षेत्रीय संघर्ष और सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा था। इसी वजह से सार्वजनिक अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार को स्थगित किया गया। अब हालात अपेक्षाकृत नियंत्रित होने के बाद अंतिम यात्रा और दफन की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आयोजित की जा रही है।
तेहरान से मशहद तक रहेगा कार्यक्रम
आधिकारिक कार्यक्रम के तहत शनिवार और रविवार को खामेनेई के पार्थिव शरीर को तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा, जहां आम नागरिकों के साथ शीर्ष राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व श्रद्धांजलि देगा।
इसके बाद सोमवार और मंगलवार को पार्थिव शरीर को कोम ले जाया जाएगा, जहां प्रमुख शिया धर्मगुरु विशेष प्रार्थना सभाओं का आयोजन करेंगे। इसके बाद अंतिम यात्रा इराक के पवित्र शहर कर्बला पहुंचेगी, जहां धार्मिक अनुष्ठानों के बाद पार्थिव शरीर को ईरान के मशहद लाया जाएगा।
मशहद में होगा सुपुर्द-ए-खाक
अंतिम संस्कार मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह परिसर में किया जाएगा, जिसे शिया समुदाय के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। इसी धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए इस स्थान को अंतिम विश्राम स्थल के रूप में चुना गया है।
सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर
ईरानी प्रशासन ने अंतिम यात्रा के दौरान भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो और किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचा जा सके।
राजनीतिक और कूटनीतिक महत्व
विश्लेषकों का मानना है कि यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि ईरान के लिए राजनीतिक और कूटनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। क्षेत्रीय तनाव और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच सरकार इस आयोजन के माध्यम से राष्ट्रीय एकजुटता और अपनी राजनीतिक स्थिति का संदेश देने की कोशिश कर रही है। इस वजह से पूरे मध्य पूर्व और वैश्विक समुदाय की नजरें इन अंतिम संस्कार समारोहों पर टिकी हुई हैं।