मुंबई। महाराष्ट्र में आगामी नगर निकाय चुनावों को लेकर सियासी माहौल लगातार गरम होता जा रहा है। इस बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के नेता संजय राउत के एक बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। उनके बयान को लेकर चुनावी माहौल में तनाव और संभावित विवाद की आशंका जताई जा रही है।
संजय राउत ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि नगर निकाय चुनाव के दिन शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के कार्यकर्ता मिलकर एक संयुक्त टीम बनाएंगे। उन्होंने दावा किया कि यह टीम मतदान के दौरान कथित दोहरे और फर्जी मतदाताओं पर नजर रखेगी। राउत के इस बयान के बाद विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
दरअसल, मुंबई और अन्य नगर निगम क्षेत्रों में भाजपा और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बढ़ते प्रभाव के बीच शिवसेना (यूबीटी) और मनसे ने आपसी तालमेल बढ़ाया है। राज ठाकरे द्वारा चुनावों को लेकर दिए गए हालिया बयानों के बाद यह गठबंधन और ज्यादा सक्रिय नजर आ रहा है।
राउत ने कहा कि 15 जनवरी को होने वाले मतदान के दिन सुबह से ही यह संयुक्त दस्ता सक्रिय रहेगा और उन्हें जहां भी मतदाता सूची में गड़बड़ी की जानकारी मिलेगी, वहां कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में फर्जी और दोहरे नामों को लेकर पहले ही राज्य निर्वाचन आयोग के समक्ष आपत्तियां दर्ज कराई जा चुकी हैं।
हालांकि, उनके बयान को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों ने इसे कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। वहीं, राउत ने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि फर्जी मतदान लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है और इसे रोकना जरूरी है।
29 नगर निकायों के चुनावों के मद्देनजर महाराष्ट्र में चुनावी प्रचार तेज हो गया है और आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी और भी तेज होने के आसार हैं।