कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनकी गिरफ्तारी और आपराधिक कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल में पुराने वोटर लिस्ट के आधार पर दोबारा विधानसभा चुनाव कराने की मांग उठाई है।
ममता बनर्जी ने बुधवार को कहा कि SIR प्रक्रिया और चुनाव संचालन को लेकर सामने आए विवादों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी और ज्ञानेश कुमार के बीच मिलीभगत रही है और इसी वजह से चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई। हालांकि, ये आरोप ममता बनर्जी के हैं।
ममता ने कहा कि पश्चिम बंगाल में दोबारा चुनाव पुराने यानी SIR से पहले की मतदाता सूची के आधार पर कराया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर हैं, तब तक देशभर में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
यह विवाद उस मीडिया रिपोर्ट के बाद और बढ़ा, जिसमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा SIR से जुड़े कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्तियां दर्ज किए जाने का दावा किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों अधिकारियों ने कई मामलों में सवाल उठाए थे। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों को लेकर कहा कि SIR से संबंधित निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए थे और उठाए गए मुद्दे प्रक्रिया के मसौदा चरण से जुड़े प्रशासनिक इनपुट थे।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में भाजपा को 208 सीटें और तृणमूल कांग्रेस को 80 सीटें मिली थीं। ममता बनर्जी अब चुनाव प्रक्रिया और SIR को लेकर इन नतीजों की वैधता पर सवाल उठा रही हैं और पुराने मतदाता रिकॉर्ड के आधार पर नए सिरे से मतदान की मांग कर रही हैं।
ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर व्यापक आंदोलन की बात भी कही है। उन्होंने न्यायपालिका से चुनावी प्रक्रिया और SIR को लेकर सामने आए विवादों पर संज्ञान लेने की अपील की है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि SIR से जुड़े निर्णय निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं।