नई दिल्ली। कैंसर से जूझ रहे मरीजों और उनके परिवारों के लिए राहत भरी खबर है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 137 जीवनरक्षक दवाओं के ट्रेड मार्जिन को अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के 30 प्रतिशत तक सीमित करने का फैसला किया है। जारी जानकारी के अनुसार, नई व्यवस्था 9 नवंबर से लागू होगी। इससे निर्धारित सीमा से अधिक कीमत पर बिक रही दवाओं के दाम कम होने की उम्मीद है।
इस सूची में एटेजोलिज़ुमैब, बेवासिज़ुमैब, डाराटुमुमैब, एन्ज़ालुटामाइड, एर्लोटिनिब, इपिलिमुमैब और लैपाटेनिब जैसी महंगी कैंसर रोधी दवाएं शामिल हैं। हालांकि, इम्यूनोथेरेपी दवा ‘कीट्रूडा’ (Keytruda) को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है।
9 नवंबर से लागू होगी नई व्यवस्था
एनपीपीए के निर्देशों के मुताबिक, दवा कंपनियों को निर्धारित ट्रेड मार्जिन सीमा के अनुसार संशोधित एमआरपी तय करनी होगी। कीमतों की गणना के लिए मार्च 2026 में वितरकों को दी गई कीमत को आधार बनाया जाएगा। जिन दवाओं की उस महीने बिक्री नहीं हुई थी, उनके लिए अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक के बिक्री आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाएगा।
यह नियम दवाओं की अलग-अलग खुराक, क्षमता और स्वरूप, जैसे टैबलेट, कैप्सूल और इंजेक्शन पर लागू होगा। जिन दवाओं की कीमत पहले से निर्धारित सीमा के भीतर है, उनके दाम में बदलाव करना अनिवार्य नहीं होगा।
अस्पतालों को सीधे आपूर्ति पर भी लागू होंगे नियम
नई व्यवस्था अस्पतालों और कैंसर संस्थानों को सीधे आपूर्ति की जाने वाली दवाओं पर भी लागू होगी। इसके अलावा, 31 मार्च 2026 के बाद बाजार में उतारे गए संबंधित नए फॉर्मूलेशन भी इसके दायरे में आएंगे।
मरीजों को दवाओं की कमी से बचाने के लिए कंपनियों को उत्पादन का मौजूदा स्तर बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। उत्पादन घटाने के लिए एनपीपीए की लिखित मंजूरी जरूरी होगी। वहीं, किसी दवा का उत्पादन या आयात पूरी तरह बंद करने की स्थिति में कम से कम छह महीने पहले सूचना देनी होगी।
सात दिनों में देनी होगी नई कीमतों की सूची
आदेश के अनुसार, दवा निर्माताओं को राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित होने के सात दिनों के भीतर संशोधित एमआरपी की जानकारी एनपीपीए और संबंधित राज्य औषधि नियंत्रकों को देनी होगी। नई कीमतों की सूची निर्धारित ऑनलाइन प्रणाली पर भी सार्वजनिक करनी होगी।
निर्धारित सीमा से अधिक कीमत वसूलने या नियमों का पालन नहीं करने पर ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) के तहत कार्रवाई की जा सकती है। अतिरिक्त वसूली गई राशि पर लागू ब्याज और अन्य देयताओं सहित वसूली का प्रावधान भी है।
सरकार के इस कदम का उद्देश्य कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली महंगी दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण रखना और मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है। हालांकि, वास्तविक राहत इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित दवाओं की मौजूदा कीमतें कितनी हैं और नई सीमा लागू होने के बाद उनकी संशोधित एमआरपी कितनी तय होती है।