नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित ‘फोर्सेस फर्स्ट कॉन्क्लेव’ में कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भर देश से आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ और ‘सेना सर्वोपरि’ की भावना के साथ रक्षा क्षेत्र के आधुनिकीकरण, स्वदेशीकरण और आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
सैनिक राष्ट्र गौरव के प्रतीक
राजनाथ सिंह ने कहा कि देश की सीमाओं पर तैनात सैनिक, समुद्र की गहराइयों में सुरक्षा कर रहे नौसैनिक और आसमान में देश की रक्षा करने वाले वायु योद्धा भारत के राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि जो राष्ट्र अपने सैनिकों का सम्मान नहीं करता, उसका भविष्य सुरक्षित नहीं हो सकता।
रक्षा क्षेत्र में बदली कार्यशैली
रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार बनने के बाद सबसे पहले रक्षा क्षेत्र को लेकर पुरानी सोच में बदलाव किया गया। सरकार ने यह संकल्प लिया कि भारत अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत करने के साथ-साथ रक्षा उपकरणों के लिए विदेशी आयात पर निर्भरता भी कम करेगा।
स्वदेशी रक्षा उद्योग को मिला बढ़ावा
उन्होंने कहा कि सरकार ने ऐसा मजबूत रक्षा औद्योगिक ढांचा विकसित करने पर जोर दिया है, जो केवल देश की जरूरतें पूरी करने तक सीमित न रहे, बल्कि भारत को रक्षा निर्यात के क्षेत्र में भी वैश्विक पहचान दिलाए। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल है।
भारत की क्षमता पर जताया भरोसा
राजनाथ सिंह ने कहा कि वर्तमान सरकार का दृष्टिकोण भारत की क्षमता, प्रतिभा और कौशल पर विश्वास करने का है। उन्होंने कहा कि देश के पास रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की पूरी क्षमता है और सरकार उसी दिशा में लगातार काम कर रही है।
आयात पर निर्भरता से रणनीतिक स्वायत्तता प्रभावित
उन्होंने कहा कि यदि कोई देश हथियार, मिसाइल, रडार, ड्रोन, गोला-बारूद और अन्य रक्षा उपकरणों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहता है, तो उसकी रणनीतिक और सैन्य स्वायत्तता भी प्रभावित होती है। इसी सोच को बदलने के लिए सरकार ने स्वदेशी रक्षा उत्पादन पर विशेष जोर दिया है।
उपभोक्ता से उत्पादक बनने की दिशा में भारत
रक्षा मंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने रक्षा क्षेत्र में केवल आधुनिकीकरण ही नहीं किया, बल्कि एक व्यापक परिवर्तन की शुरुआत की है। उन्होंने कहा कि देश अब रक्षा उपकरणों का केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि उत्पादक और निर्यातक बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।