नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिका ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि जरूरत पड़ी तो वह ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान दोबारा शुरू करने से पीछे नहीं हटेगा। इसी बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक खींचतान ने वैश्विक चिंताएं बढ़ा दी हैं।
ईरान जा रहे जहाज पर अमेरिकी कार्रवाई
अमेरिकी सेना ने शनिवार को एक गाम्बिया-ध्वज वाले मालवाहक जहाज को निशाना बनाकर उसके इंजन कक्ष को मिसाइल हमले से निष्क्रिय कर दिया। दावा किया गया कि जहाज अमेरिकी नाकेबंदी को तोड़ते हुए ईरानी बंदरगाह की ओर बढ़ रहा था। इसके बाद जहाज ओमान की खाड़ी में रुक गया।
‘जरूरत पड़ी तो फिर युद्ध करेंगे’
सिंगापुर में आयोजित रक्षा शिखर सम्मेलन में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका के पास पर्याप्त सैन्य संसाधन और आयुध मौजूद हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर वह दोबारा युद्ध शुरू करने में पूरी तरह सक्षम है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच संभावित समझौते की चर्चाएं भी जारी हैं।
ट्रंप के फैसले पर टिकी दुनिया की नजर
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समक्ष युद्धविराम और समझौते से जुड़े प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय का इंतजार है। व्हाइट हाउस ने संकेत दिए हैं कि वार्ता जारी है, लेकिन अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। वहीं, ईरान ने भी साफ किया है कि अमेरिका के साथ किसी समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया गया है।
होर्मुज पर टकराव बरकरार
ईरानी विदेश मंत्रालय का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य का प्रबंधन केवल ईरान और ओमान का विषय है। दूसरी ओर, ट्रंप ने दावा किया कि क्षेत्र में नौसैनिक नाकेबंदी हटाई जा रही है और जल्द ही जहाज बिना किसी बाधा के आवाजाही कर सकेंगे।
तेल बाजार को मिली राहत
युद्धविराम की संभावनाओं और होर्मुज मार्ग के फिर से खुलने की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड इस सप्ताह करीब 1.7 प्रतिशत फिसलकर छह सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया।
ईरान पर आर्थिक दबाव भी बढ़ा
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बताया कि अमेरिका ने लगभग एक अरब डॉलर मूल्य की ईरानी क्रिप्टोकरेंसी जब्त की है। वाशिंगटन का दावा है कि इससे तेहरान की आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।
लेबनान मोर्चे पर भी बढ़ी हलचल
इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं। कई इलाकों में हवाई हमले हुए, जिनमें छह लोगों के मारे जाने की खबर है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब लेबनान और इजरायल के सैन्य अधिकारियों के बीच बातचीत भी जारी है।
बढ़ती बेचैनी
ईरान में आम नागरिकों से लेकर राजनीतिक नेतृत्व तक, सभी की निगाहें ट्रंप के अगले कदम पर टिकी हैं। जहां कुछ लोग युद्ध समाप्त होने की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं कट्टरपंथी धड़े अमेरिका के साथ किसी भी नरम समझौते का विरोध कर रहे हैं। ऐसे में पश्चिम एशिया का भविष्य आने वाले दिनों में लिए जाने वाले राजनीतिक और सैन्य फैसलों पर निर्भर करेगा।