रायपुर। छत्तीसगढ़ जल्द ही चिकित्सा विज्ञान और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में एक नई पहचान बना सकता है। नवा रायपुर में मध्य भारत का पहला न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी सेंटर स्थापित करने की योजना तैयार की गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए एनआईटी रायपुर ने केंद्र सरकार को 250 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा है। योजना को मंजूरी मिलने पर कैंसर मरीजों को आधुनिक जांच सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने का रास्ता खुल सकता है।
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत PET-CT स्कैन में इस्तेमाल होने वाली रेडियोएक्टिव दवा FDG का उत्पादन छत्तीसगढ़ में ही करना है। फिलहाल इस दवा की आपूर्ति के लिए दूसरे क्षेत्रों पर निर्भरता रहती है। स्थानीय स्तर पर उत्पादन शुरू होने से दवा की उपलब्धता बढ़ने और जांच की लागत कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
स्थानीय उत्पादन से कम हो सकती है जांच की लागत
PET-CT स्कैन कैंसर की पहचान और शरीर में बीमारी के फैलाव का पता लगाने के लिए इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण जांच है। इसमें FDG (फ्लोरोडिऑक्सीग्लूकोज) नामक रेडियोएक्टिव दवा का उपयोग किया जाता है।
इस दवा की उपलब्धता और आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों का असर जांच की कीमत पर भी पड़ता है। नवा रायपुर में प्रस्तावित सेंटर शुरू होने से FDG का उत्पादन स्थानीय स्तर पर किया जा सकेगा। इससे बाहर से दवा मंगाने की जरूरत कम होगी और मरीजों को जांच के लिए दूसरे शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
22 हजार की जांच करीब 10 हजार रुपये में होने की संभावना
इस परियोजना को कैंसर मरीजों के लिए आर्थिक राहत देने वाली पहल माना जा रहा है। अनुमान है कि FDG का स्थानीय उत्पादन शुरू होने के बाद PET-CT जांच की मौजूदा करीब 22 हजार रुपये की लागत घटकर लगभग 10 हजार रुपये तक आ सकती है।
अगर ऐसा होता है तो मरीजों को जांच पर होने वाले खर्च में बड़ी राहत मिलेगी। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए आधुनिक कैंसर जांच पहले की तुलना में अधिक सुलभ हो सकती है। हालांकि, यह अनुमानित लागत है और वास्तविक कीमत सेंटर के संचालन तथा दवा की उपलब्धता पर निर्भर करेगी।
चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में भी बढ़ेगी छत्तीसगढ़ की पहचान
न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी सेंटर केवल कैंसर जांच तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे चिकित्सा विज्ञान और आधुनिक तकनीक से जुड़े अनुसंधान को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। नवा रायपुर में इस तरह की सुविधा विकसित होने से प्रदेश में विशेषज्ञता और तकनीकी संसाधनों का विस्तार हो सकता है।
फिलहाल एनआईटी रायपुर की ओर से भेजे गए 250 करोड़ रुपये के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार की मंजूरी का इंतजार है। प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने और निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद ही इस परियोजना की वास्तविक समयसीमा और संचालन से जुड़ी तस्वीर स्पष्ट होगी।
कुल मिलाकर, यह योजना छत्तीसगढ़ में कैंसर जांच की सुविधाओं को मजबूत करने और आधुनिक चिकित्सा तकनीक को आम मरीजों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।