5 दिन भूखी रहीं नीरू, मैच से पहले अस्पताल में हुई भर्ती; फिर एशियन गेम्स में रचा इतिहास

डेस्क। भारतीय शूटर नीरू ढांडा ने एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए व्यक्तिगत ट्रैप इवेंट में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। वह एशियन गेम्स में इस स्पर्धा में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं। खास बात यह है कि नीरू ने यह उपलब्धि बेहद मुश्किल परिस्थितियों के बीच हासिल की। प्रतियोगिता शुरू होने से करीब 10 दिन पहले उनकी तबीयत इतनी खराब हो गई थी कि उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था।

नीरू ने बताया कि बीमारी के दौरान उन्होंने करीब पांच दिनों तक कुछ नहीं खाया और सिर्फ पानी के सहारे रहीं। इस दौरान उन्होंने ट्रेनिंग भी नहीं की और ज्यादातर समय अपने कमरे में आराम करती रहीं। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और लगातार अपने कोच के संपर्क में बनी रहीं।

बीमारी के बाद मैदान पर उतरकर रचा इतिहास

नीरू के लिए एशियन गेम्स में हिस्सा लेना भी उस समय मुश्किल नजर आ रहा था। उन्होंने बताया कि अपनी खराब हालत को देखते हुए उन्हें एक वक्त लगा था कि शायद वह प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले पाएंगी। हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी फिटनेस में सुधार के बाद मुकाबले में उतरने का फैसला किया।

फाइनल मुकाबले के दौरान भी मौसम ने खिलाड़ियों की परीक्षा ली। लगातार बारिश के बीच नीरू ने शानदार निशानेबाजी करते हुए 30 में से 28 निशाने सफल किए और नया एशियाई रिकॉर्ड कायम किया। उन्होंने पिछले 24 हिट के रिकॉर्ड को चार हिट से पीछे छोड़ते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसी इवेंट में उन्होंने टीम स्पर्धा में सिल्वर मेडल भी हासिल किया।

परिवार और सेना को दिया सफलता का श्रेय

ऐतिहासिक जीत के बाद नीरू ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार, कोच, भारतीय सेना, मध्य प्रदेश स्टेट शूटिंग अकादमी, शूटिंग फेडरेशन और भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) को दिया। उनका कहना था कि जब इतने लोग उनके लिए मेहनत कर रहे हैं तो उनका काम सिर्फ अपने प्रोसेस पर भरोसा करना और पूरी मेहनत से प्रदर्शन करना है।

किसान परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचीं

नीरू ढांडा का सफर भी संघर्ष से भरा रहा है। उनके पिता किसान हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। नीरू ने बताया कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, लेकिन मध्य प्रदेश स्टेट शूटिंग अकादमी से मिली मदद ने उनके खेल करियर को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

नीरू को शूटिंग के लिए उनके रिश्तेदार और 2018 के ट्रैप सिल्वर मेडलिस्ट लक्ष्य श्योराण के परिवार से प्रेरणा मिली। शुरुआत में उन्हें शूटिंग के बारे में ज्यादा जानकारी तक नहीं थी, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने इस खेल में अपनी पहचान बनाई और अब एशियन गेम्स में ऐतिहासिक गोल्ड जीतकर देश का नाम रोशन किया है।

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