नई दिल्ली। नेपाल की राजनीति में ऐतिहासिक क्षण दर्ज हुआ है। नेपाली सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला प्रधान न्यायाधीश रह चुकीं सुशीला कार्की अब देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बन गई हैं। 73 वर्षीय कार्की ने न्यायपालिका से राजनीति तक का सफर तय कर एक नई मिसाल पेश की है।
कार्की जुलाई 2016 में नेपाल की 24वीं प्रधान न्यायाधीश नियुक्त हुई थीं और लगभग 11 महीने इस पद पर रहीं। इस दौरान उन्हें तत्कालीन शेरबहादुर देउबा सरकार द्वारा लाए गए महाभियोग प्रस्ताव का भी सामना करना पड़ा था, जिसे बाद में राजनीतिक रूप से पक्षपाती मानकर वापस ले लिया गया।
सात जून 1952 को विराटनगर (नेपाल-भारत सीमा के निकट) में जन्मी सुशीला कार्की साधारण किसान परिवार से आती हैं। उन्होंने त्रिभुवन विश्वविद्यालय से स्नातक और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। बाद में उन्होंने कानून की पढ़ाई भी पूरी की और न्यायिक सेवा में 32 वर्ष का लंबा अनुभव हासिल किया।
1979 में विराटनगर से वकालत शुरू करने वाली कार्की को 2009 में सुप्रीम कोर्ट का तदर्थ न्यायाधीश और 2010 में स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया। उन्होंने 2016 में देश की पहली महिला प्रधान न्यायाधीश बनने का गौरव प्राप्त किया।
कार्की का विवाह नेपाली कांग्रेस के लोकप्रिय नेता रहे दुर्गा प्रसाद सुबेदी से हुआ। दिलचस्प बात यह है कि दोनों की मुलाकात बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान हुई थी। सुबेदी 1970 के दशक में नेपाली कांग्रेस के क्रांतिकारी आंदोलन से जुड़े रहे और एक विमान अपहरण कांड में भी उनकी भूमिका रही।
सेवानिवृत्ति के बाद सुशीला कार्की ने ‘न्याय’ नामक आत्मकथा और ‘कारा’ नामक उपन्यास लिखा, जो 1990 के जन आंदोलन और जेल जीवन के अनुभवों से प्रेरित है।
नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में कार्की का चयन न केवल राजनीति में महिला सशक्तिकरण का प्रतीक है बल्कि यह देश की लोकतांत्रिक यात्रा में नया अध्याय भी जोड़ता है।